UJJAIN NEWS : मध्य प्रदेश के उज्जैन में खुद को अघोरी बताने वाली एक महिला का कथित वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में है। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में महिला को श्मशान घाट में जलती चिता के पास तलवार के साथ देखा गया। आरोप है कि उसने चिता से मांस का एक टुकड़ा निकाला और उसे खा लिया।

पुलिस ने इस मामले में काली नंद गिरी नाम की महिला को गिरफ्तार किया है। उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा के मुताबिक, मामले में श्मशान घाट में रहने वाले विष्णुनाथ महाराज की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 301 के तहत केस दर्ज किया गया है। अदालत ने आरोपी महिला को 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
तलवार लेकर चिता के पास पहुंची महिला
सामने आए कथित वीडियो में महिला हाथ में तलवार लेकर जलती हुई चिता के पास खड़ी नजर आती है। इसके बाद वह तलवार की मदद से चिता से कथित तौर पर मांस का एक टुकड़ा निकालती दिखाई देती है। वीडियो में इसके बाद वह उस टुकड़े को खाते हुए नजर आती है।

वीडियो सामने आने के बाद पुलिस को शिकायत दी गई, जिसके आधार पर जीवाजीगंज थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस अब वीडियो की वास्तविकता और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

सोशल मीडिया पर ‘लेडी अघोरी’ के नाम से पहचान
पुलिस के अनुसार, काली नंद गिरी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती है और खुद को उज्जैन की ‘लेडी अघोरी’ के रूप में प्रचारित करती है। उसके सोशल मीडिया वीडियो में मंदिरों और धार्मिक स्थलों से जुड़े दृश्य, कथित आध्यात्मिक अनुष्ठान और सनातन धर्म से संबंधित बातें दिखाई देती हैं। पुलिस अब उसके पुराने वीडियो, सोशल मीडिया गतिविधियों और संपर्क में रहने वाले लोगों की भी जानकारी जुटा रही है।

पहचान और पृष्ठभूमि की भी जांच
पुलिस शिकायत में महिला की पूर्व पहचान से जुड़ी जानकारी का भी उल्लेख किया गया है। पुलिस के अनुसार, उसका जन्म पुरुष के रूप में हुआ था और उसका नाम अल्लूरी श्रीनिवास बताया गया है। बाद में उसने ट्रांसजेंडर पहचान अपनाई। हालांकि, पुलिस अब उसकी पहचान, पृष्ठभूमि और उज्जैन में उसकी गतिविधियों से संबंधित जानकारी को स्वतंत्र रूप से सत्यापित कर रही है।
ठगी के आरोपों की भी जांच
उज्जैन पुलिस के मुताबिक, काली नंद गिरी के खिलाफ कुछ अन्य शिकायतों की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या उसने तेलंगाना में किसी छात्रा को कथित तौर पर ठगा था और क्या किसी अन्य महिला से तांत्रिक अनुष्ठान के नाम पर 10 लाख रुपये लिए गए थे। एसपी के मुताबिक, इन आरोपों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही पुलिस उसकी आय के स्रोत और आर्थिक गतिविधियों की जांच कर रही है।
‘अघोरी साधना को सार्वजनिक करना सही नहीं’
जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरि ने घटना की निंदा की है। उन्होंने कहा कि अघोरी साधना एक गुप्त साधना मानी जाती है और इसे सार्वजनिक प्रदर्शन का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इंसानी मांस खाने जैसी कथित गतिविधियों को अघोरी साधना के नाम पर उचित नहीं ठहराया जा सकता। उनके मुताबिक, ऐसी गतिविधियां पैशाचिक कृत्य की श्रेणी में आती हैं और लोगों को इससे सावधान रहना चाहिए। फिलहाल पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। कथित वीडियो की सत्यता, महिला की गतिविधियों और उसके खिलाफ लगाए गए अन्य आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।




































