NEW DELHI NEWS. जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा और अहम फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने आंदोलन और विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी सभी FIR रद्द करने का आदेश दिया है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला सुनाया।
कोर्ट के आदेश के बाद आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों में छात्रों और प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए विरोध प्रदर्शनों के संबंध में अब कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के अहम निर्देश
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों से संबंधित दर्ज FIR पर आगे की कार्रवाई को लेकर सरकार और संबंधित एजेंसियों को निर्देशों का पालन करना होगा। साथ ही केंद्र सरकार को आत्महत्या करने वाले पीड़ित छात्रों के परिवारों को तीन महीने के भीतर मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम को छोड़कर अन्य राज्यों में दर्ज ऐसे मामलों में जांच और कार्रवाई पर रोक रहेगी।

2,873 आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों पर केस जारी
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि प्रदर्शन के दौरान करीब 2,873 आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग भी पहुंचे थे। अदालत ने साफ किया कि जिन लोगों पर हिंसा, मारपीट, सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप हैं, उनके खिलाफ आपराधिक मामले कानून के अनुसार चलते रहेंगे।
5 सितंबर का मार्च CJP ने वापस लिया
सुनवाई से ठीक पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित अपना मार्च वापस ले लिया। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद किए गए तीनों वादों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है।
सरकार ने 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम आवेदन दायर कर NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज FIR रद्द करने की मांग की थी। दिल्ली पुलिस भी CJP के प्रदर्शन से संबंधित 13 FIR को आगे नहीं बढ़ाना चाहती थी।

आंदोलन का घटनाक्रम
-20 जून: NEET पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू हुआ।
-20 जुलाई: प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई। संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।
-25 जुलाई: मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद आंदोलन समाप्त हुआ।
-31 अगस्त: सरकार ने FIR रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम आवेदन दायर किया।
-1 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट ने आंदोलन से जुड़ी सभी FIR रद्द करने का आदेश दिया।






































