KHAIRAGARH NEWS. पंचायत विभाग के माध्यम से पूर्व में हुई शिक्षक भर्तियां अब जांच के घेरे में हैं। खैरागढ़ जिले में पंचायत विभाग के जरिए नियुक्ति पाने के बाद शिक्षा विभाग में संविलियन होकर नियमित शिक्षक बने 13 शिक्षकों की नियुक्तियों में गंभीर आपत्तियां सामने आई हैं। विभागीय जांच के दौरान मिली आपत्तियों के बाद संबंधित दस्तावेज सतर्कता आयोग, रायपुर को भेजे गए हैं। साथ ही, संबंधित शिक्षकों को आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए बुलाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

विभागीय जांच में मिलीं आपत्तियां
जानकारी के अनुसार, पंचायत विभाग के माध्यम से पूर्व में शिक्षक कर्मियों की नियुक्तियां की गई थीं। इन नियुक्तियों को लेकर शिकायतें सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान खैरागढ़ जिले के 13 शिक्षकों की नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों में आपत्तियां पाई गईं। इसके बाद नियुक्ति से संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेज सतर्कता आयोग को भेज दिए गए हैं।

संविलियन के बाद बन चुके हैं नियमित शिक्षक
मामले की गंभीरता इसलिए बढ़ गई है क्योंकि संबंधित शिक्षकों का शिक्षा विभाग में संविलियन हो चुका है। संविलियन के बाद सभी नियमित शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यदि जांच में नियुक्तियों के दौरान किसी तरह की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन साबित होता है, तो इसका असर उनकी वर्तमान सेवा स्थिति पर भी पड़ सकता है।

सतर्कता आयोग करेगा नियुक्तियों की जांच
विभागीय जांच में सामने आए तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर मामला अब सतर्कता आयोग तक पहुंच चुका है। आयोग नियुक्ति प्रक्रिया, संबंधित दस्तावेजों और विभागीय रिकॉर्ड की जांच कर सकता है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नियुक्तियों में वास्तव में किस स्तर पर अनियमितता हुई और उसका कानूनी एवं सेवा संबंधी प्रभाव क्या होगा।

13 शिक्षकों को पेशी के लिए बुलाए जाने की जानकारी
मामला सतर्कता आयोग तक पहुंचने के बाद संबंधित 13 शिक्षकों को आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए सूचना दिए जाने की बात सामने आई है। विभागीय जानकारी के अनुसार, सभी शिक्षकों को पेशी के लिए बुलाया गया था। हालांकि, इनमें से कितने शिक्षक आयोग के समक्ष उपस्थित हुए हैं, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी जिला शिक्षा कार्यालय को प्राप्त नहीं हुई है।

फिलहाल पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन 13 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में आखिर किस स्तर पर और किस तरह की गड़बड़ी हुई। विभागीय जांच में सामने आई आपत्तियां कितनी गंभीर हैं और इनका नियुक्तियों की वैधता पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह सतर्कता आयोग की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।





































