BILASPUR NEWS. स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता, बिजली की बढ़ती दरों और भारी-भरकम बिजली बिलों के विरोध में कांग्रेस ने 1 अगस्त से पूरे छत्तीसगढ़ में चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। बिलासपुर कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेसवार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री, शहर अध्यक्ष सिद्धांतशु मिश्रा एवं पूर्व विधायक शैलेश पांडेय ने राज्य सरकार की बिजली नीति पर सवाल उठाते हुए आंदोलन की विस्तृत रूपरेखा जारी की।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार स्वयं लोकसभा में स्पष्ट कर चुकी है कि स्मार्ट मीटर लगाना वैकल्पिक है, फिर भी छत्तीसगढ़ में इसे उपभोक्ताओं पर अनिवार्य रूप से थोपा जा रहा है। उनका आरोप है कि इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

प्रेसवार्ता में कांग्रेस ने दावा किया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद अनेक उपभोक्ताओं के बिजली बिल दो से तीन गुना तक बढ़ गए हैं। नेताओं के अनुसार सामान्य मीटर की तुलना में स्मार्ट मीटर अधिक तेजी से रीडिंग दर्ज कर रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को भारी भरकम बिलों का सामना करना पड़ रहा है। शहर अध्यक्ष सिद्धांतशु मिश्रा ने आरोप लगाया कि कई बंद पड़े मकानों में भी 5 से 7 हजार रुपये तक के बिल भेजे गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके आवासीय बिजली कनेक्शन को कमर्शियल कराने की प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों ने स्मार्ट मीटर लगाने का दबाव बनाया।

पूर्व विधायक शैलेश पांडेय ने आरोप लगाया कि उनके घर चार महीने तक बिजली बिल नहीं भेजा गया और बाद में बिना पूर्व सूचना के बिजली आपूर्ति काट दी गई। उन्होंने कहा कि केवल मोबाइल पर बिल भेजने की व्यवस्था उन उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन रही है, जिनके पास स्मार्टफोन उपलब्ध नहीं है।

कांग्रेस ने आंदोलन के तहत अगले दो महीनों तक घर-घर अभियान चलाकर उपभोक्ताओं से स्मार्ट मीटर और बिजली बिल संबंधी शिकायतें एकत्र करने का निर्णय लिया है। इसके लिए 8889814010 व्हाट्सएप नंबर भी जारी किया गया है, जिस पर उपभोक्ता अपने बिजली बिल और सुझाव भेज सकेंगे।
कांग्रेस के अनुसार आंदोलन के पहले चरण में बिजली विभाग के कार्यालयों का घेराव, जनमत अभियान और उपभोक्ताओं से हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद आंदोलन को और तेज करते हुए मुख्यमंत्री तथा ऊर्जा मंत्री के निवास का घेराव किया जाएगा।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें
-स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता तत्काल समाप्त की जाए।
-बढ़ी हुई बिजली दरों को वापस लिया जाए।
-400 यूनिट तक ‘बिजली बिल हाफ’ योजना दोबारा लागू की जाए।
-उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बिजली बिल प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।






































