SAKTI NEWS. जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के केलम क्षेत्र में हुए आतंकी हमले में मारे गए सक्ती जिले के मजदूर दीपक रात्रे का अंतिम संस्कार सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से जम्मू-कश्मीर में ही कर दिया गया। शव को उनके गृहग्राम नहीं लाया गया, जिससे परिजन अंतिम दर्शन तक नहीं कर सके। घटना के बाद से परिवार लगातार पार्थिव शरीर को गांव लाने की मांग करता रहा, लेकिन प्रशासन से आवश्यक अनुमति और सहयोग नहीं मिलने के कारण उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी।

परिजनों को तत्काल 2 लाख की सहायता, 12 लाख मुआवजे की घोषणा
अंतिम संस्कार के दौरान जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने मृतक के परिजनों को तत्काल 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक सौंपा। साथ ही कुल 12 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई, जिसमें शेष 10 लाख रुपये जल्द उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है।


रोजगार की तलाश में गए थे जम्मू-कश्मीर
दीपक रात्रे सक्ती जिले के बुंदेली गांव के निवासी थे। हालांकि, उनका बचपन हरदीडीह स्थित अपने मामा के घर में बीता और वहीं उनकी पढ़ाई-लिखाई हुई। उनका विवाह भी हरदीडीह से ही हुआ था। करीब एक वर्ष पहले वे अपनी पत्नी और भाई के साथ रोजगार की तलाश में जम्मू-कश्मीर गए थे, जहां मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे।

शनिवार को कुलगाम में हुए आतंकी हमले में उनकी मौत हो गई। इस घटना से परिवार के साथ पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। परिजनों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और परिवार को हरसंभव सरकारी सहायता देने की मांग की है। वहीं स्थानीय लोगों ने भी घटना की कड़ी निंदा करते हुए आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।






































