नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर राज्य के विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बस्तर के बदलते स्वरूप, औद्योगिक निवेश, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत संरचना से जुड़े प्रस्ताव प्रधानमंत्री के समक्ष रखे तथा केंद्र सरकार से आवश्यक सहयोग का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से सबसे पहले राजनांदगांव में प्रस्तावित 10,500 करोड़ रुपये की गैस आधारित यूरिया परियोजना को जल्द स्वीकृति देने की मांग की। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है और राज्य स्तर की सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं।

इस संयंत्र के शुरू होने से किसानों को उर्वरक की उपलब्धता बेहतर होगी और क्षेत्र में नए औद्योगिक अवसर भी पैदा होंगे। बैठक में मुख्यमंत्री ने उन 461 गांवों का मुद्दा भी उठाया, जहां अब तक सुरक्षा कारणों से बिजली का नियमित ग्रिड नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने इन गांवों को स्थायी विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए केंद्र से विशेष सहायता मांगी। इसके अलावा रायपुर या बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) की स्थापना के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री को ‘बस्तर विजन’ के तहत चल रहे विकास कार्यों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ और ‘बस्तर मुहिम’ के जरिए बस्तर संभाग के 5,542 गांवों में सरकारी योजनाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। इसके माध्यम से करीब 39 लाख लोगों तक राशन, आयुष्मान भारत, जनधन, वनाधिकार और प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से बंद पड़े 421 स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया है। साथ ही दंतेवाड़ा मॉडल पर ओरछा और जगरगुंडा में नई एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके।

स्वास्थ्य सेवाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत अब तक 34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। इसके अलावा जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और गीदम मेडिकल कॉलेज के संचालन के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। बैठक में बस्तर की आधारभूत संरचना पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि 3,513 करोड़ रुपये की लागत से जगदलपुर-रावघाट रेललाइन का निर्माण जारी है।

वहीं रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे, इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बैराज और हवाई संपर्क बढ़ाने जैसी परियोजनाएं भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा, चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने राज्य में निवेश की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि नई औद्योगिक विकास नीति लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ को करीब 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

राज्य में एआई डेटा सेंटर पार्क, सेमीकंडक्टर प्लांट, हाइपरस्केल डेटा सेंटर, ग्लोबल बीपीओ, इलेक्ट्रॉनिक्स, गारमेंट और अन्य अत्याधुनिक उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के चलते नीति आयोग के इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स में नियामकीय एवं संस्थागत व्यवस्था के मामले में छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर रहा है। साथ ही राज्य सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 लागू कर निवेश प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया है।
10.42 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया जा चुका है: साय
महिला सशक्तिकरण का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 10.42 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया जा चुका है। अगले चरण में 14 लाख और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने 2027 में रायपुर में प्रस्तावित लखपति दीदी सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुख्य अतिथि बनने का निमंत्रण भी दिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि 500 करोड़ रुपये के राज्य एआई मिशन के माध्यम से छत्तीसगढ़ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुशासन को बढ़ावा दिया जा रहा है।





































