NEW DELHI NEWS. धार स्थित ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला परिसर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम अंतरिम आदेश जारी किया। अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा करने के लिए भोजशाला परिसर के पास उपयुक्त खुली जगह उपलब्ध कराई जाए। साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को बिना अदालत की अनुमति परिसर में किसी भी प्रकार का संरचनात्मक बदलाव नहीं करने के निर्देश दिए गए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन शामिल थे, ने मुस्लिम पक्ष की विशेष अनुमति याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
हाईकोर्ट के फैसले को दी गई है चुनौती
सुप्रीम कोर्ट मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें भोजशाला परिसर को मां सरस्वती मंदिर मानते हुए परिसर के भीतर नमाज पर रोक लगा दी गई थी। मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि वर्षों से चली आ रही धार्मिक व्यवस्था को बदल दिया गया है।

पूजा स्थल अधिनियम का दिया हवाला
मुस्लिम पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील दी कि ‘पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991’ की भावना के अनुरूप लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था को बनाए रखा जाना चाहिए। वहीं केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद क्षेत्र में पूरी तरह शांति और कानून-व्यवस्था बनी हुई है।

ASI को स्पष्ट निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को निर्देश दिया कि न्यायालय की अनुमति के बिना भोजशाला परिसर में किसी भी प्रकार का निर्माण, तोड़फोड़ या संरचनात्मक परिवर्तन नहीं किया जाएगा।

फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसका मतलब है कि भोजशाला के मुख्य परिसर में हिंदू पक्ष की नियमित पूजा-अर्चना पूर्ववत जारी रहेगी, जबकि मुस्लिम समुदाय के लिए परिसर के पास अलग स्थान पर शुक्रवार की नमाज की व्यवस्था की जाएगी।

तीन सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब तलब करते हुए मामले की अगली विस्तृत सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की है। इस संवेदनशील मामले पर देशभर की निगाहें बनी हुई हैं।





































