RAIPUR NEWS. प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में शुक्रवार को छत्तीसगढ़ कांग्रेस की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में आदिवासी हितों, जल-जंगल-जमीन, हसदेव अरण्य और वनाधिकार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हुए 12 सूत्रीय प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। साथ ही आदिवासी समुदाय के मुद्दों को लेकर प्रदेश स्तरीय आदिवासी कमेटी के गठन का निर्णय लिया गया।

बैठक में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू सहित कई वरिष्ठ आदिवासी नेता मौजूद रहे।
दीपक बैज ने बताया कि गठित की जाने वाली प्रदेश स्तरीय आदिवासी कमेटी राज्यभर में आदिवासी समाज से संवाद स्थापित करेगी, उनके मुद्दों को समझेगी तथा जनआंदोलन की रणनीति तैयार करेगी।

बैठक में पारित प्रस्तावों में हसदेव अरण्य, परसा ईस्ट-केते बासन और केते एक्सटेंशन सहित विभिन्न खनन परियोजनाओं के लिए दी गई वन भूमि डायवर्जन और लाखों पेड़ों की कटाई की अनुमति को तत्काल रद्द करने की मांग की गई। इसके अलावा अनुसूचित जनजाति वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में 32 प्रतिशत आरक्षण लागू करने तथा लंबित आरक्षण विधेयक की अधिसूचना जारी करने की मांग उठाई गई।

कांग्रेस ने वनाधिकार कानून के तहत पात्र हितग्राहियों को वनाधिकार पट्टे देने, नक्सल हिंसा और पुलिस कार्रवाई से प्रभावित आदिवासियों के पुनर्वास, फर्जी मामलों में जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई तथा हजारों लंबित वारंट निरस्त करने की भी मांग की।
प्रस्ताव में संविधान की पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून और वनाधिकार अधिनियम के प्रावधानों के संरक्षण पर जोर देते हुए ग्राम सभाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने की मांग की गई। कांग्रेस ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के दायरे से आदिवासी समाज को बाहर रखने तथा उनकी पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा की भी मांग की।

बैठक में स्थानीय रोजगार और सरकारी नौकरियों में आदिवासियों को प्राथमिकता देने, बस्तर और सरगुजा संभाग में बंद स्कूलों को पुनः खोलने तथा आदिवासी युवाओं की भर्ती के लिए विशेष अभियान चलाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
कांग्रेस ने आदिवासियों की विशेष संवैधानिक पहचान और अधिकारों के संरक्षण की मांग करते हुए कहा कि उन्हें ‘वनवासी’ कहकर उनकी मूल पहचान को कमजोर करने के प्रयासों का विरोध किया जाएगा। साथ ही वर्ष 2026-27 की जनगणना में आदिवासियों की स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करने के लिए अलग कॉलम निर्धारित करने की मांग भी की गई।






































