RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) ने आवासीय एवं व्यावसायिक परियोजनाओं का प्रबंधन आवंटियों को हस्तांतरित नहीं करने वाले प्रदेशभर के 595 बिल्डरों और कॉलोनाइजरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। प्राधिकरण ने 989 परियोजनाओं से जुड़े प्रवर्तकों को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब तलब किया है।

रेरा की कार्रवाई के दायरे में रायपुर के अविनाश ग्रुप, सिंघानिया बिल्डकॉन, वालफोर्ट सहित कई प्रमुख रियल एस्टेट कंपनियां शामिल हैं। शिकायतों की जांच के दौरान पाया गया कि अनेक परियोजनाओं को पूर्णता प्रमाण पत्र (Completion Certificate) मिलने के बावजूद उनका संचालन और रखरखाव संबंधित आवंटियों की समिति या संघ को नहीं सौंपा गया है।

प्राधिकरण के अनुसार, भू-संपदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के तहत परियोजना पूर्ण होने के बाद सामान्य क्षेत्रों, सुविधाओं और प्रबंधन का अधिकार आवंटियों की समिति को सौंपना अनिवार्य है। इसके बावजूद कई बिल्डर स्वयं मेंटेनेंस शुल्क वसूलते हुए परियोजनाओं का नियंत्रण अपने पास बनाए हुए हैं।

रेरा ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई अधिनियम की धारा 11(4)(ई) और धारा 17 के प्रावधानों के तहत की गई है। जांच में यह भी सामने आया कि कई प्रवर्तकों ने आवंटियों की समिति या संघ के गठन की प्रक्रिया तक पूरी नहीं कराई और आवश्यक दस्तावेजों व परिसंपत्तियों का हस्तांतरण भी नहीं किया।

नोटिस पाने वाले प्रमुख नामों में श्री बिल्डकॉन, श्रीकृष्णा वाटिका (महादेव घाट), सुमीत इंफ्रा, श्री विश्व भारती, पारस बिल्डकॉन, संसार बिल्डकॉन, संकल्प बिल्डकॉन, साईंनाथ बिल्डकॉन, नीलम होम्स सहित रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर, कोरबा और अन्य शहरों के कई बिल्डर शामिल हैं।
रेरा ने यह भी रेखांकित किया कि केवल बिल्डरों ही नहीं, बल्कि आवंटियों की भी जिम्मेदारियां तय हैं। अधिनियम की धारा 19(9) के तहत प्रत्येक आवंटी को समिति, संघ या सहकारी संस्था के गठन में सक्रिय भागीदारी निभानी होगी।

प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समयावधि में जवाब प्रस्तुत नहीं करने अथवा संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने की स्थिति में संबंधित बिल्डरों के खिलाफ विधिक कार्रवाई करते हुए प्रकरण दर्ज किए जाएंगे।




































