NEW DELHI NEWS. भारत-अमेरिका संबंधों के बीच जारी खींचतान और वैश्विक भू-राजनीतिक हलचल के बीच अमेरिका के विदेश मंत्री ने शनिवार को प्रधानमंत्री से दिल्ली स्थित उनके आवास सेवा तीर्थ में अहम मुलाकात की। इस दौरान रूबियो ने अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को आधिकारिक तौर पर अमेरिका आने का न्योता सौंपा।

करीब हुई इस उच्चस्तरीय बातचीत में रक्षा सहयोग, व्यापार, ऊर्जा, रणनीतिक तकनीक, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी और पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों जैसे कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही ईरान संकट और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भी गंभीर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में शामिल रहे कई बड़े चेहरे
इस अहम राजनयिक बैठक में दोनों देशों के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। इनमें भारत के विदेश मंत्री , राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार , भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और अमेरिकी प्रशासन की वरिष्ठ अधिकारी एलिसन हूकर भी शामिल रहीं।

चीन दौरे के 7 दिन बाद भारत पहुंचे रूबियो, क्यों बढ़ी चर्चा?
रूबियो की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब राष्ट्रपति ट्रम्प हाल ही में चीन दौरे से लौटे हैं। अमेरिकी मीडिया में इस यात्रा को महज औपचारिक कूटनीतिक दौरा नहीं बल्कि एक संभावित ‘डैमेज कंट्रोल मिशन’ बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि ट्रम्प के चीन दौरे और चीनी राष्ट्रपति की सार्वजनिक प्रशंसा के बाद एशियाई रणनीतिक समीकरणों में नए सवाल उठे हैं।
अमेरिकी रिपोर्टों के मुताबिक, इस यात्रा का उद्देश्य भारत को यह भरोसा दिलाना भी हो सकता है कि एशिया में अमेरिका की रणनीति और भारत के साथ उसकी साझेदारी कमजोर नहीं होगी।

भारत-अमेरिका रिश्तों में क्यों आई थी तल्खी?
सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले एक साल में कुछ मुद्दों को लेकर दोनों देशों के संबंधों में तनाव देखने को मिला था। इनमें व्यापारिक टैरिफ, भारत-पाकिस्तान संबंधों पर अमेरिकी बयानबाजी और क्षेत्रीय कूटनीति प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

तनाव बढ़ने के दो बड़े कारण
टैरिफ और कूटनीतिक मतभेद: बीते महीनों में अमेरिका की ओर से भारत पर टैरिफ को लेकर सख्त रुख देखने को मिला। साथ ही कुछ बयानों और दावों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद भी सामने आए।
पाकिस्तान को लेकर बदला अमेरिकी रुख: हाल के दिनों में अमेरिकी प्रशासन की पाकिस्तान को लेकर बदली भाषा और क्षेत्रीय भूमिका पर टिप्पणियों ने भारत में रणनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है।

अब सबकी नजर अगले संकेत पर
दिल्ली में हुई यह मुलाकात ऐसे वक्त पर हुई है जब दुनिया की राजनीति तेजी से बदल रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह बैठक भारत-अमेरिका संबंधों में नई गर्माहट लाएगी या सिर्फ बढ़ती दूरी को संभालने की कूटनीतिक कोशिश साबित होगी?





































