JAGDALPUR NEWS. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के अंत के बाद पहली बार बस्तर पहुंचकर ‘उजर बस्तर’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उनके साथ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा भी मौजूद रहे।

जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि 1971 से 31 मार्च 2026 तक का नक्सलवाद का दौर देश के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। उन्होंने कहा कि देश का शायद ही कोई ऐसा हिस्सा होगा, जहां के जवानों ने नक्सलवाद से लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति न दी हो।

शाह ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हिंसा, खून-खराबा और विकास का अंधकार लंबे समय तक बना रहा। तीन पीढ़ियां नक्सलवाद की छाया में गुजरी हैं, लेकिन अब एक ऐसा लक्ष्य हासिल हुआ है, जो कभी असंभव माना जाता था।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद खत्म करने का उद्देश्य केवल उग्रवादियों का सफाया करना नहीं, बल्कि बस्तर के आदिवासी और गरीब परिवारों तक शहरों जैसी सुविधाएं पहुंचाना है। ‘नियद नेल्लानार’ योजना के तहत गांव-गांव में सस्ते राशन की दुकानें खोली जा रही हैं। इसके अलावा प्राथमिक स्कूल, पेयजल, आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसी मूलभूत सुविधाएं भी लोगों तक पहुंचाई जा रही हैं।

3 हजार युवाओं के पुनर्वास पर काम
गृह मंत्री ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करीब 3 हजार युवाओं के पुनर्वास पर काम कर रही हैं। इनमें लगभग 2 हजार युवा अशिक्षित हैं, जिन्हें Rashtriya Swayamsevak Sangh के स्वयंसेवक पढ़ना-लिखना सिखा रहे हैं, ताकि वे मुख्यधारा से जुड़ सकें।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने निर्देश दिए हैं कि नक्सलवाद खत्म होने के बाद भी विकास कार्यों की रफ्तार धीमी नहीं होनी चाहिए। अगले पांच वर्षों में इन गांवों को पूरी तरह विकसित और आत्मनिर्भर आदिवासी क्षेत्रों में बदलने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि डेयरी उद्योग और वन उत्पादों के जरिए बस्तर में रोजगार के नए अवसर तैयार किए जाएंगे। शाह ने दावा किया कि देश के अन्य हिस्सों में आजादी दशकों पहले आई थी, लेकिन बस्तर अब वास्तविक विकास और शांति का अनुभव कर रहा है।
‘जन जन सुविधा केंद्र’ का उद्घाटन
इससे पहले अमित शाह ने नेतानार गांव में ‘जन जन सुविधा केंद्र’ मॉडल का उद्घाटन किया। यह केंद्र पहले वर्ष 2013 से सुरक्षा चौकी के रूप में संचालित हो रहा था, जिसे अब आदिवासी समुदाय के लिए सेवा और कल्याण केंद्र में बदला गया है।

इस अवसर पर गृह मंत्री ने कहा कि यह दिन ऐतिहासिक है और आने वाले छह महीनों में यह केंद्र आदिवासी समाज की गतिविधियों से पूरी तरह जीवंत दिखाई देगा। उन्होंने नेतानार को शहीद वीर गुंडा धुर की कर्मभूमि बताते हुए इसे पूरे देश के लिए प्रेरणास्थल बताया।


































