HAVANA NEWS. अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) के प्रमुख जॉन रैटक्लिफ की हालिया गुप्त हवाना यात्रा के बाद क्यूबा में अमेरिकी सैन्य हमले की आशंका अत्यधिक बढ़ गई है। संभावित सैन्य टकराव और बाहरी आक्रमण को देखते हुए क्यूबा सरकार ने देश भर में युद्ध जैसी आपातकालीन तैयारियां तेज कर दी हैं। सीएनएन (CNN) की एक रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी हवाना में कई प्रमुख सरकारी इमारतों को संभावित अमेरिकी हवाई और जमीनी हमलों की स्थिति से निपटने के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं।

तनावपूर्ण माहौल के बीच क्यूबा में आम नागरिकों को व्यापक स्तर पर सैन्य प्रशिक्षण दिया जा रहा है। देश भर में लोगों को विशेष रूप से ‘गुरिल्ला युद्ध’ की ट्रेनिंग दी जा रही है और उन्हें किसी भी आपात स्थिति के लिए चौबीसों घंटे तैयार रहने को कहा गया है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह प्रशिक्षण क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो की प्रसिद्ध रणनीतिक अवधारणा ‘पूरी आबादी की लड़ाई’ (War of the Entire Population) के तहत दिया जा रहा है, ताकि नियमित सेना के साथ-साथ आम जनता भी मोर्चे पर डट सके। क्यूबा के सरकारी मीडिया में आम नागरिकों को पुराने सोवियत दौर के हथियारों के साथ अभ्यास करते और पारंपरिक साधनों जैसे बैलों से एंटी-एयरक्राफ्ट गन खींचते हुए दिखाया गया है।

कड़े प्रतिरोध के लिए सक्षम है क्यूबा
सैन्य इतिहासकार हाल क्लेपाक ने इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भले ही क्यूबा के पास आधुनिक हथियारों की भारी कमी है, लेकिन इसके बावजूद क्यूबा की सेना किसी भी अमेरिकी हमले का लंबे समय तक कड़ा प्रतिरोध करने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी क्यूबा ने बड़े स्तर पर अपने नागरिकों को संगठित करने की अद्भुत क्षमता दिखाई है, जो युद्ध काल में उसकी सबसे बड़ी ताकत साबित होगी। क्यूबा मामलों के विशेषज्ञ पीटर कॉर्नब्लुह ने सीआईए चीफ की इस यात्रा को ‘दबाव वाली कूटनीति’ करार दिया है।

अमेरिका ने रोकी तेल सप्लाई, हालात हुए बेकाबू
इस सैन्य तनाव के बीच क्यूबा की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। क्यूबा लंबे समय से अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों और तेल नाकेबंदी का सामना कर रहा है। चालू वर्ष के जनवरी महीने से ही अमेरिका ने वेनेजुएला से क्यू巴 को होने वाली तेल सप्लाई को लगभग पूरी तरह रोक दिया है। इसके साथ ही अन्य देशों को भी कड़ी चेतावनी दी गई है कि वे क्यूबा को ईंधन न भेजें। हाल ही में अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने कोलंबिया से क्यूबा जा रहे एक तेल टैंकर को भी बीच रास्ते में रोक लिया था।

इस कड़े आर्थिक और ईंधन प्रतिबंध का सीधा असर क्यूबा की आम जनता पर दिख रहा है। 9 जनवरी के बाद से वहां कोई भी बड़ी तेल खेप नहीं पहुंची है, जिसके कारण देश के ब्लैक मार्केट में पेट्रोल की कीमत करीब 35 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच चुकी है। देश के अधिकांश हिस्सों में रोजाना भारी बिजली कटौती हो रही है, अस्पतालों में जीवन रक्षक सर्जरीज टाली जा रही हैं और दवाओं समेत जरूरी खाद्य सामग्रियों की तीव्र किल्लत बनी हुई है।
निवेश के मौके तलाश रहे हैं डोनाल्ड ट्रम्प
दूसरी तरफ, डोनाल्ड ट्रम्प क्यूबा के इस संकट को एक व्यावसायिक अवसर के रूप में देख रहे हैं। ट्रम्प ने एक बयान में क्यूबा को ‘एक असफल देश’ बताते हुए कहा कि उनके पास न पैसा है और न तेल। हालांकि, उन्होंने क्यूबा की जमीन और सुहावने मौसम की तारीफ करते हुए इसे एक सुंदर द्वीप बताया और व्यापारिक निवेश की इच्छा जताई।

सीआईए की गतिविधियों का पुराना इतिहास
क्यूबा सरकार लंबे समय से अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानती रही है। इतिहास गवाह है कि 1960 के दशक में फिदेल कास्त्रो की हत्या के लिए सीआईए ने विस्फोटक सिगार और जहरीले स्कूबा सूट जैसी कई गुप्त और खतरनाक योजनाएं बनाई थीं। हवाना में आज भी सीआईए की इन कथित गतिविधियों से जुड़े विशेष संग्रहालय मौजूद हैं, जो जनता को सतर्क रखने का काम करते हैं।




































