रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत अपील का असर अब राज्यों में भी दिखाई देने लगा है। कई राज्यों में मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने अपने काफिलों में वाहनों की संख्या घटाने का फैसला किया है।
इसी बीच छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर सरकारी कर्मचारियों के लिए “वर्क फ्रॉम होम” व्यवस्था लागू करने की मांग की है। यह मांग ऐसे समय में उठी है, जब दिल्ली सरकार पहले ही अपने कर्मचारियों के लिए सप्ताह में दो दिन घर से काम करने की सुविधा देने की घोषणा कर चुकी है।
फेडरेशन ने अपने पत्र में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता तथा कीमतों को लेकर संकट की आशंका बनी हुई है। ऐसे समय में ईंधन संरक्षण और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता बढ़ गई है। संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा संरक्षण संबंधी अपील का समर्थन करते हुए कहा कि यह फैसला जनहित और राष्ट्रहित में है।
फेडरेशन ने यह भी उल्लेख किया कि छत्तीसगढ़ शासन पहले से ही ई-ऑफिस और पेपरलेस व्यवस्था लागू कर चुका है, जिससे अधिकांश प्रशासनिक कार्य ऑनलाइन माध्यम से किए जा सकते हैं। ऐसे में आवश्यकता के अनुसार सरकारी कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू करना व्यावहारिक कदम होगा। संगठन का कहना है कि नया रायपुर स्थित मंत्रालय और अन्य सरकारी कार्यालयों में रोजाना बड़ी संख्या में कर्मचारी वाहनों से आवागमन करते हैं। यदि वर्क फ्रॉम होम लागू किया जाता है, तो ईंधन की बचत के साथ-साथ ट्रैफिक और प्रदूषण में भी कमी आएगी।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में घोषणा की थी कि सरकारी कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन घर से काम करने की सुविधा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस पहल को जनआंदोलन का रूप देना चाहती है और निजी कंपनियों से भी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देने की अपील की जाएगी। उनका मानना है कि इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या घटेगी, ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण कम होगा।


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