RAIPUR NEWS. राजधानी रायपुर में वर्षों पुराने गृह निर्माण ऋण घोटाले में आखिरकार बड़ी कार्रवाई करते हुए आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने लंबे समय से फरार चल रहे दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 25 मार्च तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

यह घोटाला 1990 के दशक का है, जब जरूरतमंदों को मकान उपलब्ध कराने के नाम पर सरकारी योजना के तहत करोड़ों रुपये का गबन किया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार, वर्ष 1995 से 1998 के बीच 186 लोगों के नाम पर एक-एक लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया और कुल 1 करोड़ 86 लाख रुपये जारी किए गए।

हालांकि, बाद में जब जमीन पर सत्यापन किया गया, तो स्थिति पूरी तरह अलग मिली। जिन स्थानों पर मकान निर्माण का दावा किया गया था, वहां न तो कोई निर्माण मिला और न ही कथित लाभार्थियों का कोई अस्तित्व सामने आया। इससे स्पष्ट हो गया कि पूरा घोटाला कागजों पर ही रचा गया था।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से पूरे सिस्टम को गुमराह किया। कूटरचित प्रमाण पत्र तैयार किए गए, बिना समुचित जांच के ऋण स्वीकृत कराए गए और बाद में उपयोगिता प्रमाण पत्र भी जारी कर दिए गए। इस तरह सुनियोजित तरीके से सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया।

EOW के अनुसार, इस मामले में शामिल दो अन्य आरोपी अब जीवित नहीं हैं, जिससे जांच और अधिक जटिल हो गई है। वहीं, गिरफ्तार दोनों आरोपी लंबे समय से फरार थे और नोटिस के बावजूद जांच एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हो रहे थे।

फिलहाल, पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है, ताकि इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों और संभावित मिलीभगत के स्तर का पता लगाया जा सके। अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ में कई अहम खुलासे हो सकते हैं।


































