RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में बुधवार को जंबूरी आयोजन को लेकर जमकर हंगामा हुआ। प्रश्नकाल शुरू होते ही कांग्रेस विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने बालोद जिले में आयोजित जंबूरी में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए विधानसभा समिति से जांच कराने की मांग की। हालांकि, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए जांच कराने से इंकार कर दिया। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

प्रश्नकाल के दौरान विधायक राघवेंद्र सिंह ने पूछा कि जंबूरी आयोजन के लिए टेंडर किसकी अध्यक्षता में और कब जारी किया गया, जबकि मंत्री की नियुक्ति 13 दिसंबर 2025 को हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि 10 दिसंबर को पहला टेंडर जारी हुआ, जिसे निरस्त कर 23 दिसंबर को दूसरा टेंडर निकाला गया। विधायक ने यह भी कहा कि जंबूरी आयोजन से जुड़े 90 बिंदुओं को घटाकर 52 कर दिया गया और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही काम शुरू कर दिया गया, जो गंभीर अनियमितता है।

मंत्री गजेंद्र यादव ने जवाब देते हुए कहा कि टेंडर प्रक्रिया प्रशासनिक स्तर पर कलेक्टर के अधीन होती है और शासन की प्रक्रियाएं किसी व्यक्ति विशेष की नियुक्ति से प्रभावित नहीं होतीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य कार्यकारिणी की अनुमति से ही सभी निर्णय लिए गए हैं और इसमें कोई गड़बड़ी नहीं हुई।

बहस के दौरान भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने भी टिप्पणी की, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। इस बीच नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने मंत्री पर सवालों से बचने का आरोप लगाया और कहा कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विपक्ष सदन से बहिर्गमन करता है।

विपक्ष लगातार यह मांग करता रहा कि टेंडर जारी होने से पहले काम शुरू करने के मामले की विधानसभा समिति से जांच कराई जाए। लेकिन मंत्री ने साफ कहा कि जहां कोई घोटाला या गड़बड़ी नहीं है, वहां जांच की जरूरत नहीं है। मंत्री के इस रुख के बाद विपक्ष ने विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट कर दिया, जिससे मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज हो गया।

































