RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को एलपीजी सिलेंडर की कथित कमी का मुद्दा उठते ही सदन में तीखा हंगामा हो गया। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि प्रदेश में सिलेंडर नहीं मिलने से आम लोग और होटल संचालक परेशान हैं। इस पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि यह विषय विधानसभा के अधिकार क्षेत्र से बाहर है, जिसके बाद पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार नारेबाजी शुरू हो गई।

हंगामे के बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है। इसी दौरान सभापति ने विपक्ष का स्थगन प्रस्ताव खारिज कर दिया। बाद में वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने पर कांग्रेस के कुछ विधायकों को सदन से निलंबित कर दिया गया। सदन में कार्यक्रमों के भुगतान का मुद्दा भी उठा। भाजपा विधायक लता उसेंडी ने कहा कि कई कार्यक्रम मौखिक और लिखित आदेश पर कराए गए, लेकिन उनका भुगतान अब तक नहीं हुआ है।

इस पर मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि यदि संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं तो मामले की जांच कर भुगतान कराया जाएगा। इस पर कांग्रेस विधायक कवासी लखमा ने तंज कसते हुए कहा कि जब लता उसेंडी की ही सुनवाई नहीं हो रही, तो विपक्ष की क्या सुनी जाएगी। प्रश्नकाल के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ती मौतों का मुद्दा भी गूंजा। अकलतरा विधायक राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि उनके क्षेत्र में 2024 में 76 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई थी, जो 2025 में बढ़कर 86 हो गई।

वहीं 2026 में 1 जनवरी से 14 फरवरी के बीच ही 13 लोगों की जान जा चुकी है। इस पर मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रदेश में सड़कों के विस्तार, वाहनों की संख्या बढ़ने और लोगों की लापरवाही के कारण दुर्घटनाएं होती हैं। 2024 की तुलना में 2025 में मौतों का अनुपात कुछ कम हुआ है। उन्होंने बताया कि सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और जहां अधिक हादसे हो रहे हैं, वहां संबंधित विभागों के साथ मिलकर समाधान किया जाएगा।

वहीं विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं का विषय गृह, परिवहन और अन्य विभागों से जुड़ा है, इसलिए सभी विभागों को मिलकर समन्वय के साथ काम करना चाहिए। प्रश्नकाल के दौरान विधायक किरण सिंह देव ने सुकमा जिले में झीरम घाटी से एलेंगनार-उरकापाल-कांदानार तक 18 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य की स्थिति पर सवाल उठाया। सरकार की ओर से बताया गया कि इस परियोजना के लिए 14 करोड़ 60 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे और 30 जनवरी 2023 को टेंडर जारी किया गया था।

अब तक अर्थवर्क और जीएसबी तक का काम पूरा हुआ है, जिस पर 4 करोड़ 23 लाख रुपए का भुगतान किया जा चुका है। सरकार ने देरी का कारण क्षेत्र के घोर नक्सल प्रभावित और दुर्गम पहाड़ी होने को बताया। साथ ही कहा कि टेंडर को दो भागों में बांटकर काम आगे बढ़ाया जाएगा और उच्च स्तरीय अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे।




































