NEW DELHI/RAIPUR NEWS. केंद्र सरकार ने घरेलू रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। अब 14.2 किलोग्राम का घरेलू एलपीजी सिलेंडर 60 रुपए महंगा होकर 913 रुपए में मिलेगा, जबकि पहले इसकी कीमत 853 रुपए थी। वहीं 19 किलोग्राम के कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में 115 रुपए की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद इसकी कीमत 1883 रुपए हो गई है। वहीं, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में घरेलू 14.2 किलोग्राम LPG गैस सिलेंडर की कीमत हाल तक करीब ₹924 चल रही थी। अब इसमें ₹60 की बढ़ोतरी लागू होगी है, तो नई कीमत लगभग ₹984 प्रति सिलेंडर मिलेगा। हालांकि कंपनियों के अनुसार कुछ रुपए ऊपर-नीचे हो सकते हैं।
नई दरें 7 मार्च से लागू कर दी गई हैं। इससे पहले 8 अप्रैल 2025 को घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में 50 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी। यानी करीब एक साल बाद फिर कीमतों में इजाफा हुआ है। वहीं 1 मार्च 2026 को कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम में 31 रुपए तक की वृद्धि की गई थी। गैस की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण भारत में गैस की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने 5 मार्च को आपात अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है।

आदेश के मुताबिक अब रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का उपयोग प्राथमिक रूप से रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी। सरकार ने निर्देश दिया है कि सभी कंपनियां प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों को प्राथमिकता से करें। इनमें इंडियन ऑयल (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इसका मकसद उपभोक्ताओं को बिना किसी रुकावट के गैस सिलेंडर की सप्लाई सुनिश्चित करना है।
गैस की संभावित कमी को लेकर एसोसिएशन ऑफ सीजीडी एंटिटीज (ACE) ने सरकारी कंपनी गेल (GAIL) को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। कंपनियों का कहना है कि अगर कतर से मिलने वाली सस्ती गैस की सप्लाई प्रभावित होती है तो उन्हें स्पॉट मार्केट से महंगी गैस खरीदनी पड़ेगी। फिलहाल स्पॉट मार्केट में गैस की कीमत करीब 25 डॉलर प्रति यूनिट तक पहुंच गई है, जो दीर्घकालिक कॉन्ट्रैक्ट वाली गैस की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। कंपनियों को यह भी आशंका है कि यदि सीएनजी के दाम बढ़े, तो लोग बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्ट हो सकते हैं, जिससे गैस सेक्टर को नुकसान हो सकता है।

सप्लाई संकट की दो बड़ी वजह
1- भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का असुरक्षित होना है। करीब 167 किलोमीटर लंबा यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 54 प्रतिशत एलएनजी इसी मार्ग से आयात करता है।

2- मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव के बीच ड्रोन हमलों के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाले प्रमुख देश कतर ने अपने एलएनजी प्लांट का उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया है। भारत अपनी कुल एलएनजी जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत यानी करीब 2.7 करोड़ टन सालाना गैस कतर से आयात करता है। ऐसे में सप्लाई बाधित होने से घरेलू बाजार पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।





































