NEW DELHI NEWS. देश के बाजारों में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले तीन महीनों में चीनी के दामों में करीब 40 प्रतिशत तक की तेजी का दावा करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। खड़गे ने चीनी के घटते स्टॉक, आयात की जरूरत और गन्ने के एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।

खड़गे के अनुसार, देश के प्रमुख शहरों में चीनी का खुदरा भाव बढ़कर करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। उनका दावा है कि तीन महीने के भीतर कीमत में लगभग 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इससे घरेलू बजट पर भी सीधा असर पड़ रहा है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जब भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है, तो घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में इतनी तेजी क्यों आई और स्टॉक कथित तौर पर नौ साल के निचले स्तर तक कैसे पहुंच गया?
खड़गे ने सरकार से पूछे तीन सवाल
खड़गे ने सरकार की चीनी नीति को लेकर तीन प्रमुख सवाल उठाए हैं। पहला, देश में चीनी का स्टॉक इतना कम क्यों हुआ? दूसरा, चीनी निर्यात पर रोक लगाने के बाद अब 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री चीनी आयात करने की जरूरत क्यों पड़ी? तीसरा, जब घरेलू बाजार में चीनी के दाम बढ़ रहे हैं तो गन्ने के रस और शीरे का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन के लिए बढ़ाने की नीति क्यों जारी है?

‘ये कैसा आत्मनिर्भर भारत?’
खड़गे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर देश में चीनी का आयात करना पड़ रहा है और दूसरी ओर गन्ने को एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने इसी संदर्भ में सवाल उठाया कि “ये कैसा आत्मनिर्भर भारत है?”

सरकार ने एथेनॉल नीति को बताया बेअसर
वहीं, केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों में तेजी के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। सरकार का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के कारण घरेलू चीनी की उपलब्धता प्रभावित नहीं हुई है।
कीमतों पर नियंत्रण और घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर यानी कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। अब चीनी के बढ़ते दामों के बीच कांग्रेस के सवाल और सरकार की सफाई ने इस मुद्दे पर सियासत और तेज कर दी है।






































