TEHRAN-TEL AVIV NEWS. पश्चिम एशिया में छिड़ा संघर्ष अब एक पूर्ण सैन्य युद्ध का रूप ले चुका है। 5 मार्च 2026 तक, इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमलों ने ईरान के सैन्य ढांचे को भारी चोट पहुंचाई है। युद्ध के छठे दिन तनाव उस समय और बढ़ गया जब हिंद महासागर में श्रीलंका के तट के पास एक अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी ने ईरानी नौसेना के युद्धपोत ‘IRIS देना’ को टारपीडो से निशाना बनाकर डुबा दिया। इस हमले में लगभग 87 ईरानी नौसैनिकों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।

युद्ध के ताजा हालात-
ईरानी नेतृत्व पर संकट- रिपोर्टो के अनुसार, युद्ध की शुरुआत में ही सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में नेतृत्व का संकट गहराया है। अब उनके बेटे मोज्तबा खामेनेई को नया उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया तेज हो गई है।

हवाई हमलों की बौछार-इजरायली वायुसेना (IAF) ने पिछले 24 घंटों में तेहरान, इस्फ़हान और बुशहर स्थित परमाणु व मिसाइल केंद्रों पर 1,600 से अधिक उड़ानें भरी हैं। तेहरान में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के मुख्यालय को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है।

ईरान का जवाब -भारी नुकसान के बावजूद ईरान ने हार नहीं मानी है। आज (गुरुवार) सुबह ईरान ने इजरायल के तेल अवीव और यरूशलेम को निशाना बनाकर ‘खैबर शिकन’ बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, इजरायल के ‘एरो’ और ‘डेविड स्लिंग’ डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।

कैजुअलिटी रिपोर्ट- ईरानी मीडिया के अनुसार, अब तक देश में मरने वालों की संख्या 1,045 से ऊपर पहुंच चुकी है। वहीं, इजरायल में भी 12 नागरिकों की मौत और सैकड़ों लोगों के घायल होने की खबर है।
क्षेत्रीय विस्तार और वैश्विक प्रभाव
यह युद्ध अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया। लेबनान में हिजबुल्ला ने उत्तरी इजरायल पर रॉकेट हमले तेज कर दिए हैं, जिसके जवाब में इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में जमीनी कार्रवाई शुरू कर दी है। उधर, कतर, कुवैत और यूएई स्थित अमेरिकी ठिकानों पर भी ड्रोन हमले हुए हैं, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल है।

भारत के लिए भी चिंता का विषय
भारत के लिए स्थिति बेहद संवेदनशील है। हिंद महासागर में डूबा ईरानी युद्धपोत हाल ही में भारत में आयोजित ‘मिलान 2026’ नौसेना अभ्यास में हिस्सा लेकर लौट रहा था। जिसमे सवार लगभग 80 लोगों के डूबने की खबर सामने आयी है। इजरायली हमले तेज होने के बाद भारत सरकार ने अपने नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ने की सलाह दी है और चाबहार पोर्ट जैसे रणनीतिक हितों को लेकर चिंता व्यक्त की है।

विशेषज्ञों की राय-रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले 48 घंटों में युद्धविराम की पहल नहीं हुई, तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल को पार कर सकती हैं। जिससे वैश्विक मंदी का खतरा उत्पन्न होने की भी सम्भवना है।




































