NEW DELHI NEWS. बहुचर्चित निठारी कांड में सुप्रीम कोर्ट से दोषमुक्त होने के बाद नई जिंदगी शुरू करने वाले सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, उनका शव भूपतवाला क्षेत्र में चाय के खोखे के भीतर मिला। पुलिस ने इसे प्रथम दृष्टया आत्महत्या माना है और मामले की जांच शुरू कर दी है। मौके से कोई सुसाइड नोट मिलने की सूचना नहीं है। रिहाई के बाद कोली हरिद्वार में चाय और समोसे का खोखा चला रहे थे। उनके करीबियों और मददगारों के मुताबिक, कारोबार को लेकर वह पिछले कुछ समय से परेशान थे।

आरोप है कि खोखा मालिक ने किराया 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया था और एडवांस भुगतान के लिए भी लगातार दबाव बनाया जा रहा था। इसी दबाव को वे कोली की परेशानी से जोड़ रहे हैं। हालांकि, पुलिस ने अभी इस दावे को आत्महत्या का पुष्ट कारण नहीं बताया है और मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। निठारी मामले में वर्षों जेल में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट से दोषमुक्त होने पर कोली बाहर आए थे। रिहाई के बाद उनके परिचितों ने उन्हें नौकरी के बजाय अपना छोटा काम शुरू करने की सलाह दी थी।

इसी के बाद उन्होंने हरिद्वार में चाय-समोसे का खोखा शुरू किया। पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत और पूर्व प्रधान जोगा सिंह जैसे लोग जेल के दौरान भी उनसे संपर्क में रहे थे। रावत के अनुसार, कोली फोन पर अक्सर अपने खोखे और आर्थिक स्थिति की जानकारी देते थे। उन्हें हिम्मत रखने और काम जारी रखने की सलाह दी जाती थी। मददगारों के मुताबिक, हालिया अमावस्या के दौरान अच्छी बिक्री की उम्मीद में कोली ने बड़ी मात्रा में आलू के समोसे तैयार किए थे। बारिश के कारण सामान खराब हो गया और उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। इसी बीच खोखे के किराए में बढ़ोतरी और भुगतान को लेकर दबाव बढ़ने का दावा किया जा रहा है।

मददगारों का कहना है कि कोली इस परेशानी का जिक्र फोन पर करते थे। उन्हें समझाया गया था कि हालात से घबराने के बजाय धैर्य रखें। इसके बावजूद उन्होंने यह कदम क्यों उठाया, इसे लेकर उनके करीबी हैरान हैं। करीबियों के अनुसार, जेल से बाहर आने के बाद भी कोली अपने परिवार से दूरी और गांव में अपनी मां कुंती देवी से न मिल पाने की पीड़ा का जिक्र करते थे। मंगरूखाल के पूर्व प्रधान जोगा सिंह के अनुसार, कोली का मानना था कि निठारी मामले में उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिला और उन्हें पूरे मामले का मुख्य दोषी बना दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष निठारी मामले से जुड़े अंतिम लंबित मामले में भी कोली को दोषमुक्त कर दिया था। इसके बाद वह जेल से बाहर आए और हरिद्वार में रहने लगे। कोली के मददगार अब खोखा मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संभावनाओं पर विधिक राय ले रहे हैं। उनका आरोप है कि किराए में अचानक बढ़ोतरी और भुगतान के दबाव से कोली मानसिक तनाव में थे। हालांकि, इस संबंध में किसी आपराधिक आरोप को अभी पुलिस की जांच से पुष्टि नहीं मिली है।हरिद्वार पुलिस ने मौत की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है। पोस्टमॉर्टम और जांच के बाद ही मौत के कारणों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।





































