NEW DELHI NEWS. करीब 38 साल पहले नौकरी से वंचित की गई महिला को आखिरकार सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिला। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने 1988 में सुमित्रा को केवल इस आधार पर नियुक्ति नहीं दी थी कि वह महिला हैं और एलपीजी सिलेंडर उठाने का काम नहीं कर पाएंगी। लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अब IOC को सुमित्रा को 12 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

49 नामों में अकेली महिला, 48 पुरुषों को नियुक्ति
हरियाणा के गुढ़ा गांव की रहने वाली सुमित्रा ने वर्ष 1988 में IOC के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में खलासी, चपरासी या रीफिलिंग हेल्पर के पद के लिए आवेदन किया था। डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता वाली समिति ने कुल 49 उम्मीदवारों की अनुशंसा की थी, जिसमें सुमित्रा भी शामिल थीं।
लेकिन नियुक्ति के समय 48 पुरुष उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिए गए, जबकि सुमित्रा को बाहर कर दिया गया। उनके खिलाफ मुख्य आधार यही बताया गया कि महिला होने के कारण वह सिलेंडर उठाने का काम नहीं कर पाएंगी।

ट्रायल कोर्ट ने माना था भेदभाव
सुमित्रा ने अपने अधिकारों के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। ट्रायल कोर्ट ने माना कि वह निर्धारित योग्यता पूरी करती थीं और उन्हें लिंग के आधार पर भेदभाव करते हुए नौकरी से वंचित किया गया। हालांकि, 1993 में प्रथम अपीलीय अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया। इसके बाद मामला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

‘महिला होने के कारण नौकरी से वंचित करना गरिमा के खिलाफ’
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने IOC के तर्कों को खारिज करते हुए लैंगिक भेदभाव पर कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि केवल महिला होने के आधार पर नौकरी से वंचित करना नारीत्व का अपमान और महिला की गरिमा के खिलाफ है।
पीठ ने कहा कि जब देश में महिलाओं के सम्मान और समानता की बात की जाती है, तब एक सरकारी कंपनी का इस तरह का रवैया स्वीकार नहीं किया जा सकता।

अब नौकरी की उम्र निकल चुकी, इसलिए मुआवजा
सुमित्रा की उम्र अब सेवानिवृत्ति की आयु तक पहुंच चुकी है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नौकरी देने के बजाय 12 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। करीब चार दशक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद यह फैसला लैंगिक भेदभाव के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।





































