TAMILNADU NEWS .तमिलनाडु में विजय की अगुवाई वाली सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार अब घर पर बच्चे की डिलीवरी कराने और मेडिकल संस्थानों के बाहर प्रसव होने के मामलों पर सख्ती करने की तैयारी में है। प्रस्तावित नए कानून में ऐसे प्रसव को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान शामिल किया जाएगा।

विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री ने किया ऐलान
स्वास्थ्य विभाग के लिए अनुदान की मांग पर चर्चा के दौरान स्वास्थ्य मंत्री के.जी. अरुणराज ने विधानसभा में सरकार की योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा तमिलनाडु पब्लिक हेल्थ एक्ट, 1939 काफी पुराना हो चुका है। बदलती स्वास्थ्य जरूरतों और नई चुनौतियों को देखते हुए सरकार नया तमिलनाडु पब्लिक हेल्थ एक्ट लाने की तैयारी कर रही है। मंत्री के मुताबिक, नए कानून में अस्पताल या अन्य मेडिकल संस्थान के बाहर होने वाले प्रसव को लेकर भी प्रावधान किए जाएंगे। खास तौर पर घर पर प्रसव कराने की प्रथा को दंडनीय बनाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। यह घोषणा स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी सरकार की 115 प्रस्तावित घोषणाओं में पहली बताई गई है।

जल्द लाया जाएगा अलग संशोधन
स्वास्थ्य सचिव दराज अहमद ने भी संकेत दिया है कि नए कानून की प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही घर पर डिलीवरी से जुड़े प्रावधान में अलग से संशोधन लाने की तैयारी है, ताकि इस मामले में जल्द कार्रवाई की जा सके। फिलहाल देश में सामान्य परिस्थितियों में घर पर प्रसव कराना अपने आप में कोई अलग आपराधिक अपराध नहीं है। हालांकि, तमिलनाडु सरकार का प्रस्ताव सुरक्षित प्रसव और संस्थागत डिलीवरी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।

महिला की मौत के बाद तेज हुई बहस
घर पर प्रसव को लेकर सरकार की सख्ती के पीछे कोयंबटूर जिले में सामने आया एक हालिया मामला भी अहम माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जून में उथुकुली के पास पुंजई थलाइविपालयम की 32 वर्षीय शशिकला ने घर पर अपने दूसरे बच्चे को जन्म दिया था। प्रसव के करीब चार दिन बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद घर पर प्रसव से जुड़े जोखिम और सुरक्षित मातृत्व को लेकर सवाल उठे। सरकार अब ऐसे मामलों को रोकने के लिए कानूनी प्रावधानों को और सख्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

सुरक्षित प्रसव पर सरकार का फोकस
सरकार का जोर महिलाओं को प्रसव के दौरान आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने और जोखिम की स्थिति में तत्काल उपचार सुनिश्चित करने पर है। नए कानून के आने के बाद घर पर प्रसव कराने वालों और मेडिकल संस्थानों के बाहर होने वाले प्रसव को लेकर नियम पहले की तुलना में काफी सख्त हो सकते हैं। हालांकि, प्रस्तावित कानून के अंतिम प्रावधान, सजा का स्वरूप और किन परिस्थितियों में यह कानून लागू होगा, इसकी स्पष्ट जानकारी कानून के आधिकारिक रूप से पेश होने के बाद ही सामने आएगी।






































