RAIPUR NEWS. राजधानी रायपुर में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जालसाजों ने एक महिला बैंक मैनेजर को पहले कार शोरूम संचालक बनकर फोन किया और करीब 2 करोड़ रुपये की एफडी कराने का झांसा दिया। कई दिनों तक बातचीत कर भरोसा जीतने के बाद आरोपियों ने फर्जी ई-मेल और दस्तावेजों के जरिए बैंक खाते से 5 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर करा लिए।

मामले का खुलासा तब हुआ, जब बैंक मैनेजर ने भुगतान के करीब 40 मिनट बाद वास्तविक ग्राहक से संपर्क किया। ग्राहक ने भुगतान आवेदन भेजने से इनकार कर दिया। इसके बाद बैंक अधिकारियों को फर्जीवाड़े की जानकारी हुई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कार शोरूम संचालक बनकर किया फोन
पुलिस के मुताबिक, महिला बैंक मैनेजर के पास एक अनजान नंबर से फोन आया था। कॉल करने वाले ने खुद को कार शोरूम का संचालक बताते हुए बैंक में करीब 2 करोड़ रुपये की एफडी कराने की इच्छा जताई। आरोपी ने एफडी की ब्याज दर, नियम और प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी भी ली।
कई दिनों तक बातचीत के जरिए आरोपी ने बैंक मैनेजर का विश्वास हासिल कर लिया। इसके बाद उसने फर्जी दस्तावेज और ई-मेल के माध्यम से भुगतान संबंधी आवेदन भेज दिया।

फर्जी ई-मेल से 5 लाख रुपये ट्रांसफर
शिकायत के अनुसार, आरोपी की ओर से भेजे गए फर्जी ई-मेल और दस्तावेजों को देखकर बैंक मैनेजर ने प्रक्रिया के तहत करीब 5 लाख रुपये एक खाते में ट्रांसफर कर दिए। हालांकि, लगभग 40 मिनट बाद जब बैंक की ओर से वास्तविक ग्राहक से संपर्क किया गया तो उसने ऐसा कोई भुगतान आवेदन भेजने से साफ इनकार कर दिया।
इसके बाद बैंक अधिकारियों को समझ आया कि जालसाजों ने फर्जी ई-मेल और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रकम ट्रांसफर कराई है।
मोबाइल नंबर और ई-मेल के जरिए आरोपियों की तलाश
मामले की शिकायत के बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। जांच टीम मोबाइल नंबर, फर्जी ई-मेल आईडी, बैंक खाते और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि ठगी के पीछे कितने लोग शामिल हैं और रकम किस खाते में ट्रांसफर की गई।

बड़े भुगतान में बरतें सावधानी
यह मामला बताता है कि जालसाज पहले भरोसा कायम करते हैं और फिर फर्जी ई-मेल, दस्तावेज या भुगतान अनुरोध के जरिए ठगी को अंजाम देते हैं। ऐसे मामलों में केवल ई-मेल या दस्तावेज देखकर भुगतान करने के बजाय संबंधित व्यक्ति से स्वतंत्र माध्यम से फोन पर पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
बैंक और कंपनियों को बड़े निवेश या भुगतान से जुड़े किसी भी अनुरोध की दोबारा पुष्टि करनी चाहिए, ताकि इस तरह की साइबर ठगी से बचा जा सके।





































