DURG NEWS. हर छोटे विवाद के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाना जरूरी नहीं। संवाद, आपसी समझ और सहमति के जरिए गांव स्तर पर भी कई विवादों का शांतिपूर्ण समाधान किया जा सकता है। इसी सोच को साकार करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग की टीम ग्राम कुथरेल पहुंची, जहां सामुदायिक मध्यस्थता शिविर, विधिक जागरूकता कार्यक्रम और जन-जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा विवाद बढ़ाएं नहीं, संवाद से समाधान करें।

प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में स्थायी लोक अदालत की अध्यक्ष सुषमा लकड़ा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार बसंत और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव उमेश कुमार भागवतकर ने ग्रामीणों को सामुदायिक मध्यस्थता की उपयोगिता की जानकारी दी। कार्यक्रम में सरपंच, उपसरपंच, जनप्रतिनिधि, पैरालीगल वालेंटियर्स सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।

मध्यस्थता से गांव में ही समाधान की राह
अधिकारियों ने बताया कि छोटे सामाजिक, पारिवारिक और स्थानीय विवादों को न्यायालय तक पहुंचने से पहले ही सामुदायिक मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाया जा सकता है। इसमें आपसी संवाद, विश्वास और सहमति के जरिए विवाद का समाधान तलाशा जाता है। इससे न केवल समय और संसाधनों की बचत होती है, बल्कि आपसी संबंध भी बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।
कार्यक्रम में मीडिएशन 3.0 की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि मध्यस्थता अब केवल वैकल्पिक विवाद समाधान की प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक-सक्षम, समयबद्ध और नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है। ग्रामीणों को प्रशिक्षित सामुदायिक मध्यस्थों की भूमिका और गांव स्तर पर विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के सफल प्रयासों से भी अवगत कराया गया।

नशामुक्ति से साइबर सुरक्षा तक जागरूकता
विधिक जागरूकता कार्यक्रम में अपराधमुक्त ग्राम, नशामुक्ति, टोनही प्रथा उन्मूलन, बाल संरक्षण, गुड टच-बैड टच, साइबर अपराध और डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों पर सरल भाषा में जानकारी दी गई। बच्चों और युवाओं को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने, शिक्षा पर ध्यान देने, सकारात्मक जीवनशैली अपनाने और नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया।

रैली में गूंजा—‘विवाद बढ़ाएं नहीं, संवाद से समाधान करें’
कार्यक्रम के बाद ग्राम पंचायत से बाजार क्षेत्र तक जन-जागरूकता रैली निकाली गई। प्रचार वाहन के माध्यम से सामुदायिक मध्यस्थता, मीडिएशन 3.0, विधिक अधिकार, अपराध नियंत्रण और सामाजिक समरसता से जुड़े संदेश प्रसारित किए गए। ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक रैली में हिस्सा लिया।
खास बात यह रही कि प्रचार वाहन के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा सामुदायिक मध्यस्थता पर तैयार विशेष छत्तीसगढ़ी गीत भी प्रसारित किया गया। गीत के जरिए ग्रामीणों को संवाद, सहमति और आपसी समझ से विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान करने का संदेश दिया गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की यह पहल केवल विधिक जागरूकता तक सीमित नहीं रही, बल्कि न्याय को गांव की चौपाल तक पहुंचाने और समुदाय को न्याय प्रक्रिया का सहभागी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। आयोजन के माध्यम से विवाद-मुक्त, जागरूक और न्याय-सशक्त ग्रामीण समाज के निर्माण का संदेश दिया गया।





































