RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ विधानसभा में बुधवार को इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार और वन्यजीव तस्करी का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि मामले में गिरफ्तार महाराष्ट्र पुलिस के इंटेलिजेंस सेल से जुड़े जवान का नाम पहले सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया और क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक संरक्षण या सिंडिकेट काम कर रहा है। महंत ने कहा कि वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो पहले ही संवेदनशील इलाकों में शिकार और तस्करी को लेकर अलर्ट जारी कर चुका था, इसके बावजूद वन विभाग प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सका। उन्होंने आरोप लगाया कि टाइगर रिजर्व में चोरी की घटना के दौरान कैमरे दो घंटे तक बंद रहे और सरकार ने स्वयं स्वीकार किया है कि पिछले 30 महीनों में छह बाघों की मौत हुई है।

इसके जवाब में वन मंत्री केदार कश्यप ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी आरोपी को बचाने या उसका नाम छिपाने की कोशिश नहीं की गई। उन्होंने कहा कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व में लगे 126 कैमरे पूरी तरह कार्यरत हैं और कैमरे बंद होने की बात तथ्यहीन है। सरकार बाघ संरक्षण को लेकर गंभीर है तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है। कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों की मौजूदा संख्या और बजट की जानकारी मांगी। मंत्री कश्यप ने बताया कि वर्ष 2022 के आकलन के अनुसार रिजर्व में पांच बाघों की पुष्टि हुई थी।

चरणदास महंत ने कहा कि बस्तर में नक्सल गतिविधियां कम होने के बाद अब वन्यजीव तस्कर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के महीनों में कई बाघों का शिकार हुआ और महाराष्ट्र पुलिस से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी के बावजूद विभाग ने पारदर्शिता नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बाघ संरक्षण पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, फिर भी लगातार शिकार की घटनाएं चिंता का विषय हैं।

सरकार ने कार्रवाई का दिया पूरा ब्यौरा
वन मंत्री ने सदन में बताया कि मार्च 2026 में दर्ज एक मामले में एक बाघ की खाल बरामद होने के बाद 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। वहीं 29 जून को मिली सूचना के आधार पर कांकेर जिले में संयुक्त अभियान चलाकर महाराष्ट्र के गढ़चिरौली निवासी बियेश्वर गेड़ाम और बाबूराव मडावी को दो बाघों की खाल, 13 मूंछें और एक मोटरसाइकिल के साथ गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि बियेश्वर गेड़ाम महाराष्ट्र पुलिस के इंटेलिजेंस सेल में सिपाही है, जबकि बाबूराव मडावी पुलिस का गोपनीय मुखबिर था।

सर्च ऑपरेशन में तीसरी खाल और वन्यजीव अवशेष भी मिले
मंत्री ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ के बाद छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर नेतीवाड़ा गांव में व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान शिकार में इस्तेमाल होने वाले फंदे, चाकू, 12 नाखून, चार कैनाइन दांत और इंद्रावती नदी किनारे छिपाकर रखी गई एक और बाघ की खाल बरामद की गई। बरामद सभी नमूनों को डीएनए और वैज्ञानिक जांच के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून भेजा गया है।





































