WASHINGTON NEWS. मध्य-पूर्व में जारी तनाव अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। रणनीतिक दृष्टि से दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट में दो तेल टैंकरों में हुए विस्फोट के बाद क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की गलत जानकारी के कारण दोनों टैंकर समुद्र में बिछी माइंस से टकरा गए, जिससे उनमें भीषण विस्फोट और आग लग गई।

हालांकि, अमेरिका ने ईरान के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसे भ्रामक प्रचार बताते हुए कहा कि उसकी सेना ने लगातार सातवीं रात भी ईरान के सैन्य ठिकानों और समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाकर हवाई हमले किए हैं।

ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले
CENTCOM के अनुसार, अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के सीरिक, बुशेहर, बंदर अब्बास, केश्म द्वीप और यज्द समेत कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए। अमेरिकी सेना ने इन ऑपरेशनों का वीडियो भी सोशल मीडिया पर जारी किया है। इन हमलों के बाद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और तेज हो गई हैं।

ईरान की खुली चेतावनी, खाड़ी देशों में बढ़ी चिंता
अमेरिकी हमलों के बीच ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी सांसद अहमद बख्शायेश अर्देस्तानी ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने ईरान पर जमीनी हमला किया तो ईरानी सेना कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर ईरानी सेना इन देशों में प्रवेश कर अमेरिकी ठिकानों को तबाह कर देगी।

वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई या बाधा का सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है।






































