DURG NEWS. बीमा क्लेम खारिज करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, दुर्ग ने एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी की कार्रवाई को सेवा में कमी और घोर व्यावसायिक कदाचरण माना है। आयोग ने कंपनी को मृतक के होम लोन की बकाया राशि चुकाने के साथ ही परिवादी को मानसिक क्षतिपूर्ति और वाद व्यय की राशि देने का आदेश दिया है।

सुपेला भिलाई के वार्ड नंबर-6, पुरानी बस्ती निवासी अर्चना निगम के पति स्व. बृजेश प्रसाद निगम ने 23 जून 2020 को एचडीएफसी फाइनेंस कंपनी से करीब 13 लाख रुपये का गृह ऋण लिया था। ऋण की सुरक्षा के लिए उन्होंने 27,303 रुपये का एकल प्रीमियम देकर एचडीएफसी लाइफ की बीमा पॉलिसी भी ली थी।
लेकिन ऋण लेने के कुछ ही महीनों बाद 13 दिसंबर 2020 को बृजेश प्रसाद निगम का निधन हो गया। इसके बाद उनकी पत्नी ने बीमा कंपनी से क्लेम करते हुए बीमा राशि से लोन खाते का समायोजन करने की मांग की।

बीमा कंपनी ने कहा—लोन से पहले से गंभीर बीमारी थी
बीमा कंपनी ने 31 जुलाई 2021 को क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि मृतक लोन लेने से पहले ही गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। इस फैसले के खिलाफ अर्चना निगम ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने बीमा कंपनी के दावे से संबंधित दस्तावेजों और साक्ष्यों का परीक्षण किया। आयोग के समक्ष कंपनी मृतक के लोन लेने से पहले गंभीर बीमारी से पीड़ित होने का ठोस दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी।

बिना सबूत क्लेम खारिज करना माना सेवा में कमी
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संतोष कुमार, सदस्य नीलू ठाकुर एवं संध्या बाजपेयी ने दोनों पक्षों की दलीलों और प्रस्तुत दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद माना कि बीमा कंपनी ने पर्याप्त साक्ष्य के बिना क्लेम निरस्त किया। आयोग ने इसे सेवा में त्रुटि एवं घोर व्यावसायिक कदाचरण माना।

30 दिन में करना होगा भुगतान
आयोग ने बीमा कंपनी को मृतक के लोन खाता क्रमांक 985196 की बकाया ऋण राशि का पूर्ण भुगतान करने का आदेश दिया है। इसके अलावा परिवादी को 10,000 रुपये मानसिक कष्ट की क्षतिपूर्ति और 5,000 रुपये वाद व्यय के रूप में देने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग ने आदेश के पालन के लिए 30 दिन की समय-सीमा तय की है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर 11,61,045 रुपये की राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।

क्लेम के भरोसे लिया था कर्ज, अब आयोग ने दिलाई राहत
मामले में आयोग के आदेश से मृतक के परिवार को बड़ी राहत मिली है। बीमा कंपनी द्वारा बीमारी का हवाला देकर क्लेम खारिज किए जाने के बाद शुरू हुआ विवाद अब उपभोक्ता आयोग के फैसले के साथ परिवादी के पक्ष में समाप्त हुआ है।





































