RAIPUR NEWS. रायपुर सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में एल्युमिनियम उद्योगों से निकलने वाले अति-विषैले अपशिष्ट स्पेंट पॉट लाइनिंग (SPL) के अवैध निपटान और इसे वाणिज्यिक कोयले में मिलाकर बेचे जाने का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से इस अवैध गतिविधि पर की गई कार्रवाई, जनस्वास्थ्य पर इसके प्रभाव और दोषी उद्योगों की जवाबदेही को लेकर सवाल किए।
लोकसभा में पूछे गए तारांकित प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक कोयले में SPL की मिलावट पूरी तरह गैर-कानूनी है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने वाली इकाइयों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

बृजमोहन अग्रवाल ने एल्युमिनियम उद्योगों द्वारा प्रस्तुत पर्यावरण, सामाजिक एवं शासन (ESG) रिपोर्टों का हवाला देते हुए पूछा कि विषैले कचरे के कारण आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभावों को देखते हुए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। उन्होंने सीमेंट उद्योगों में SPL के सुरक्षित निपटान, पिछले पांच वर्षों में दर्ज उल्लंघनों और तृतीय-पक्ष विक्रेताओं की विफलता की स्थिति में मूल उत्पादक कंपनियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की।

सरकार ने अपने जवाब में बताया कि खतरनाक एवं अन्य अपशिष्ट (प्रबंधन तथा सीमापार परिवहन) नियम, 2016 के तहत SPL को अति-खतरनाक अपशिष्ट की श्रेणी में रखा गया है। इसका निपटान केवल अधिकृत रीसाइक्लर्स या TSDF (ट्रीटमेंट, स्टोरेज एंड डिस्पोजल फैसिलिटी) के माध्यम से ही किया जा सकता है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) संबंधित इकाई को बंद करने, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने और आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई कर सकता है।

केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि 1 जुलाई 2025 को अधिसूचित संशोधित नियमों के तहत 1 अप्रैल 2026 से एल्युमिनियम उत्पादकों पर विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) लागू कर दिया गया है। इसके तहत सभी उत्पादक कंपनियों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के डिजिटल पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा और विषैले कचरे के संग्रहण, रीसाइक्लिंग एवं सुरक्षित निपटान की पूरी जिम्मेदारी मूल उत्पादक कंपनी की होगी।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का प्रमुख औद्योगिक राज्य है, जहां कई बड़े एल्युमिनियम संयंत्र संचालित हैं। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास जरूरी है, लेकिन पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं। विषैले SPL को कोयले में मिलाकर बेचना पानी, हवा और मिट्टी के साथ-साथ आम नागरिकों के जीवन के लिए भी गंभीर खतरा है।

उन्होंने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एल्युमिनियम संयंत्रों, तृतीय-पक्ष विक्रेताओं और सीमेंट उद्योगों की नियमित एवं कड़ी निगरानी करने की मांग की। साथ ही कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि संयंत्र सील करने और आपराधिक मामला दर्ज करने जैसे कठोर कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के नागरिकों को स्वच्छ हवा और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।





































