DURG NEWS. दुर्ग जिला अस्पताल में सिकल सेल रोग से पीड़ित युवती दीपिका गाढ़ा की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो डॉक्टरों सहित सात स्वास्थ्यकर्मियों को जिम्मेदार ठहराया है। कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर अपर कलेक्टर योगिता देवांगन और सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी द्वारा की गई जांच के आधार पर चार कर्मचारियों की संविदा सेवा समाप्त कर दी गई है, जबकि तीन अन्य के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।

जांच में सामने आया कि 1 जून को अस्पताल के ब्लड बैंक में 85 यूनिट रक्त उपलब्ध होने के बावजूद पीड़िता को समय पर ब्लड नहीं दिया गया। परिजनों को ब्लड बैंक भेजकर डोनर की व्यवस्था करने के लिए कहा गया, लेकिन डोनर नहीं मिलने के बाद भी उपलब्ध रक्त जारी नहीं किया गया। जांच में चिकित्सकों और संबंधित कर्मचारियों की लापरवाही भी सामने आई।

कार्रवाई के तहत रेडक्रॉस सोसायटी से नियुक्त लैब टेक्नीशियन तरन्नुम जहां और नशरा परवीन, तथा एनएचएम से नियुक्त स्टाफ नर्स जागेश्वरी देवी और तनुजा चंद्राकर की संविदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। वहीं स्टाफ नर्स अनसतसिया केरकेट्टा, पीजी रेजिडेंट डॉ. निखिल अग्रवाल और एनएचएम विशेषज्ञ डॉ. तृप्ति तिवारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए संयुक्त संचालक को पत्र भेजा गया है।

हालांकि, मामले में ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. जे.पी. मेश्राम और आरएमओ डॉ. अखिलेश यादव के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि बयान बदलने के बावजूद दोनों अधिकारियों को बचा लिया गया।

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से एनएचएम स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन ने नाराजगी जताई है। संगठन का आरोप है कि मामले में केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर प्रकरण को बंद करने की कोशिश की जा रही है, जबकि वास्तविक जिम्मेदार अधिकारियों को बचाया गया है। संगठन ने इस संबंध में निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग को लेकर कलेक्टर से मुलाकात करने की घोषणा की है।






































