SAKTI NEWS. अंधविश्वास और तंत्र-साधना के नाम पर अपने ही बेटों की बलि चढ़ाने वाले एक सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने दो सगे भाइयों की हत्या के मामले में उनकी मां, दो बहनों और एक भाई को दोषी ठहराते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने माना कि आरोपियों ने अंधविश्वास का विरोध करने वाले दोनों भाइयों को सुनियोजित साजिश के तहत जहर देकर मौत के घाट उतार दिया था।

मामला ग्राम तांदुलडीह का है, जहां फिरीतबाई सिदार अपने परिवार के साथ घर के एक कमरे में सात दिनों तक बंद रही। इस दौरान कमरे से लगातार चीख-पुकार और अजीब आवाजें आने लगीं। पड़ोसियों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा खुलवाया तो अंदर तंत्र-साधना और धार्मिक अनुष्ठान का माहौल मिला। कमरे में उज्जैन के एक बाबा की तस्वीर रखी थी और परिवार के सदस्य उपवास कर पूजा-पाठ में लीन थे।

जमीन पर अचेत मिले दोनों युवक
पुलिस जब कमरे में दाखिल हुई तो विकास सिदार (25) और विक्की सिदार (22) अचेत अवस्था में जमीन पर पड़े मिले। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। हैरत की बात यह रही कि परिजन तब भी दावा करते रहे कि दोनों युवक विशेष साधना के जरिए दोबारा जीवित हो जाएंगे।

अंधविश्वास का विरोध बना मौत की वजह
जांच में सामने आया कि परिवार की बड़ी बेटी अमेरिका सिदार छह वर्ष पहले उज्जैन के एक बाबा से गुरु दीक्षा लेकर आई थी। इसके बाद पूरे परिवार में तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास का प्रभाव बढ़ता गया। मृतक विकास और विक्की लगातार इसका विरोध करते थे और परिवार को इस रास्ते से दूर रहने की सलाह देते थे। पुलिस के अनुसार, इसी कारण उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रची गई।
आरोपियों ने दोनों भाइयों को विशेष पूजा और जाप में शामिल होने के लिए बुलाया तथा पानी में कीटनाशक मिलाकर पिला दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। बाद में पूरे घटनाक्रम को धार्मिक अनुष्ठान के दौरान हुई सामान्य मौत साबित करने की कोशिश की गई।

एफएसएल रिपोर्ट बनी सबसे बड़ा सबूत
मामले की जांच के दौरान पुलिस और एफएसएल टीम ने घटनास्थल से पूजा सामग्री, हवन सामग्री, धार्मिक साहित्य, जड़ी-बूटियां, नोटबुक, कपड़े और कीटनाशक जब्त किए थे। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर आरोप साबित किए।
करीब डेढ़ वर्ष तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने सभी साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए मृतकों की मां फिरीतबाई सिदार, बहन अमेरिका सिदार, चंद्रिका सिदार और भाई विशाल सिदार को दोषी करार दिया तथा चारों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई।




































