BILASPUR NEWS. जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनियों द्वारा मनमाने ढंग से क्लेम खारिज करने की प्रवृत्ति पर सख्त टिप्पणी करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने माना कि बिना ठोस तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्य के बीमा दावा अस्वीकार करना “सेवा में कमी” की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को 28.24 लाख रुपये से अधिक की राशि ब्याज सहित डेढ़ महीने के भीतर अदा करने का आदेश दिया है।
आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल तथा सदस्य पूर्णिमा सिंह और आलोक कुमार पाण्डेय की पीठ ने यह फैसला कोरबा निवासी एके शर्मा की शिकायत पर सुनाया।

खदान में काम के दौरान लगी थी आग
जानकारी के अनुसार, एके शर्मा की वोल्वो क्राउलर एक्सकेवेटर मशीन 7 अगस्त 2021 को एसईसीएल की बिजारी खदान में कार्यरत थी। इसी दौरान मशीन में अचानक आग लग गई, जिससे वह गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई। मशीन का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से ‘कॉन्ट्रैक्ट प्लांट एंड मशीनरी पॉलिसी’ के तहत कराया गया था।

सर्वेयर ने माना था शॉर्ट सर्किट हादसे की वजह
घटना के बाद मशीन मालिक ने मरम्मत पर आए 46.41 लाख रुपये के खर्च का दावा बीमा कंपनी के समक्ष प्रस्तुत किया। जांच के लिए नियुक्त सर्वेयर मैक इंश्योरेंस सर्वेयर ने अपनी रिपोर्ट में कंट्रोल पैनल में हुए इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट को आग लगने का कारण बताया और इसे आकस्मिक दुर्घटना माना।

ऑपरेटर की लापरवाही बताकर क्लेम किया खारिज
इसके बावजूद बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि मशीन का ऑपरेटर उसे चालू अवस्था में छोड़कर चला गया था, जो पॉलिसी शर्तों का उल्लंघन है। कंपनी ने इसी आधार पर भुगतान से इनकार कर दिया।
ऑटो-कट तकनीक ने खोली कंपनी की दलील की पोल
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि संबंधित मशीन में अत्याधुनिक ‘ऑटो-कट’ तकनीक लगी हुई थी, जिसके तहत चाबी बंद होने के तीन मिनट बाद मशीन स्वतः पूरी तरह बंद हो जाती है। आयोग ने कहा कि ऐसी स्थिति में ऑपरेटर की लापरवाही का आरोप टिकता ही नहीं है।

पीठ ने यह भी कहा कि बीमा कंपनी ऑपरेटर की कथित लापरवाही को किसी भी तकनीकी या प्रत्यक्ष साक्ष्य से साबित नहीं कर सकी। इसलिए क्लेम खारिज करना अनुचित और सेवा में कमी माना जाएगा।
उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूती देने वाला फैसला
आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह निर्धारित अवधि के भीतर परिवादी को 28.24 लाख रुपये से अधिक की राशि ब्याज सहित अदा करे। यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके वैध दावों को अक्सर तकनीकी आधारों का हवाला देकर खारिज कर दिया जाता है।






































