DURG NEWS. ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे विवादों को अदालत तक पहुंचने से पहले ही सुलझाने के उद्देश्य से दुर्ग जिले में सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा जारी ‘कम्युनिटी मेडिएशन टुवर्ड्स ए लिटिगेशन-फ्री रूरल इंडिया’ एसओपी-2026 के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) दुर्ग ने जिले के पांच गांवों—घुघसीडीह, ननकट्ठी, अरसनारा, निकुम और कुथरेल—का चयन किया है।

इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पारिवारिक, सामाजिक, पड़ोसी, भूमि तथा अन्य सामुदायिक विवादों का समाधान आपसी संवाद, सहमति और सौहार्दपूर्ण माहौल में करना है। इससे न केवल न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम होगा, बल्कि गांवों में सामाजिक समरसता और भाईचारे को भी बढ़ावा मिलेगा।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा चयनित गांवों में सामुदायिक मध्यस्थता तंत्र को मजबूत बनाने के लिए जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण कार्यशालाएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में पंचायत प्रतिनिधियों, पैरालीगल वालंटियर्स, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीण नागरिकों को मध्यस्थता की प्रक्रिया और उसके लाभों की जानकारी दी जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार, सामुदायिक मध्यस्थता एक ऐसी वैकल्पिक विवाद निवारण प्रणाली है, जिसमें दोनों पक्षों की स्वैच्छिक भागीदारी और आपसी सहमति के आधार पर समाधान निकाला जाता है। यह प्रक्रिया सरल, त्वरित और कम खर्चीली होने के साथ-साथ सामाजिक संबंधों को बनाए रखने में भी मददगार साबित होती है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने ग्रामीणों से विवादों के समाधान के लिए संवाद और मध्यस्थता की संस्कृति को अपनाने की अपील की है। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल ‘वाद-मुक्त ग्रामीण भारत’ के लक्ष्य को साकार करने के साथ-साथ गांवों में स्थायी शांति, सामाजिक एकता और न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।






































