BHILAI NEWS. दुर्ग जिले के कोहका स्थित एक निजी स्कूल में फीस बकाया को लेकर दो छात्राओं की पढ़ाई रुकवाने और बाद में स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) देने से इनकार करने का मामला तूल पकड़ गया है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के मुखिया द्वारा कथित रूप से आत्महत्या किए जाने के बाद अब यह मामला राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक पहुंच गया है। आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने स्कूल प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाते हुए मामले की सुनवाई फास्टट्रैक प्रक्रिया से कराने के निर्देश दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, पीड़ित महिला रेखा रामटेके ने अधिवक्ता सौरभ चौबे के माध्यम से आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में बताया गया है कि वह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। इलाज के चलते परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई और घर तक बेचना पड़ गया। उनकी दो बेटियां नित्या रामटेके (14) और ट्रिप्सी रामटेके (9) कोहका स्थित एमजी विद्यालय में अध्ययनरत थीं।

परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण फीस जमा नहीं हो सकी। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने बच्चियों को परीक्षा और नियमित पढ़ाई से वंचित कर दिया तथा फीस जमा होने तक स्कूल आने से रोक दिया। परिजनों का कहना है कि इसी मानसिक तनाव और सामाजिक दबाव के चलते बच्चियों के पिता ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
पति की मौत के बाद जब रेखा रामटेके अपनी बेटियों का सरकारी स्कूल में दाखिला कराने के लिए टीसी लेने पहुंचीं, तब स्कूल प्रबंधन ने दो वर्षों की कथित बकाया फीस जमा करने की शर्त रख दी। आरोप है कि जिन वर्षों में बच्चियों को स्कूल नहीं आने दिया गया, उस अवधि की फीस भी मांगी जा रही है।

शिक्षा के अधिकार पर सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने इसे गंभीर बताते हुए कहा कि किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित करना शिक्षा के अधिकार अधिनियम की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर प्रतीत होते हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी।
आयोग ने 24 जून को स्कूल प्रबंधन और जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को तलब किया। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो स्कूल संचालक को भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ सकता है।

स्कूल प्रबंधन ने आरोपों से किया इनकार
वहीं एमजी विद्यालय की प्राचार्य मनप्रीत फूलमाली ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि दोनों छात्राओं ने संबंधित वर्षों की परीक्षाएं दी हैं और इसके दस्तावेज स्कूल के पास उपलब्ध हैं। उन्होंने आयोग से रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है।

डीईओ बोले- नहीं मिली जानकारी
दूसरी ओर जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने कहा कि उन्हें इस मामले अथवा बाल आयोग द्वारा जारी किसी नोटिस की जानकारी नहीं है।
अब पूरे मामले पर सबकी नजरें आयोग की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। यह सुनवाई तय करेगी कि बच्चियों को उनका शिक्षा का अधिकार दिलाने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।





































