RAIPUR NEWS. सहकारी गृह निर्माण समितियों को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने और 20 लाख रुपये से अधिक के गबन के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक एवं परिसमापक राजकुमार नायडू के खिलाफ विशेष न्यायालय में लगभग 3500 पन्नों का चालान पेश किया है। जांच में आरोपी पर पद का दुरुपयोग कर नियमों की अनदेखी करते हुए सहकारी समितियों की संपत्तियों में गंभीर अनियमितताएं बरतने के आरोप प्रमाणित पाए गए हैं।
एसीबी ने राजकुमार नायडू के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक न्यासभंग), 420 (धोखाधड़ी) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया था। विस्तृत जांच के बाद अब मामले का अभियोग पत्र विशेष न्यायालय में दाखिल कर दिया गया है।

भूखंडों का पंजीयन निरस्त कर सस्ते में बेचने का आरोप
जांच के अनुसार, राजकुमार नायडू ने राष्ट्रीय खनिज विकास निगम गृह निर्माण समिति और भैरव गृह निर्माण समिति में परिसमापक रहते हुए अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कई फैसले लिए। आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रीय खनिज विकास निगम गृह निर्माण समिति के 13 पहले से आवंटित और पंजीकृत भूखंडों का पंजीयन छलपूर्वक निरस्त कराया और नए सदस्य बनाकर उन्हीं भूखंडों को निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत कलेक्टर गाइडलाइन दर से कम कीमत पर बेच दिया।

सड़क और रास्तों की भूमि भी बेची
एसीबी की जांच में यह भी सामने आया कि समिति में सड़क और सार्वजनिक रास्तों के लिए सुरक्षित रखी गई भूमि का भी नियमों को दरकिनार कर विक्रय कर दिया गया, जिससे समितियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

एक ही परिवार को तीन भूखंड, सदस्य से धोखाधड़ी
भैरव गृह निर्माण समिति में आरोपी ने नियमों का उल्लंघन करते हुए एक ही परिवार के तीन सदस्यों को भूखंड आवंटित कर उनका पंजीयन कराया। वहीं, एक सदस्य से भूखंड की पूरी राशि प्राप्त करने के बावजूद बिना सूचना दिए उसी भूखंड का पंजीयन दूसरे व्यक्ति के नाम कर दिया गया।

निजी उपयोग में खर्च की समिति की रकम
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि भूखंड बिक्री से प्राप्त राशि और निलंबन अवधि के बाद भी समिति के बैंक खातों से निकाली गई रकम का आरोपी ने निजी उपयोग किया। एसीबी के मुताबिक इन अनियमितताओं से दोनों समितियों को 4 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति हुई, जबकि 20 लाख रुपये से ज्यादा की राशि का गबन कर उसका व्यक्तिगत इस्तेमाल किया गया।
एसीबी ने 3500 पन्नों के चालान के साथ मामले से जुड़े दस्तावेजी एवं वित्तीय साक्ष्य भी विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किए हैं। अब प्रकरण की सुनवाई एसीबी विशेष न्यायालय में होगी, जहां आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।






































