BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के चर्चित ताड़मेटला नरसंहार मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी किए जाने के निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि 76 जवानों की शहादत जैसे गंभीर मामले में भी जांच एजेंसियां असली अपराधियों तक पहुंचने और ठोस सबूत पेश करने में पूरी तरह विफल रहीं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अभियोजन पक्ष अदालत के समक्ष कोई ऐसा विश्वसनीय और कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके आधार पर आरोपियों को दोषी ठहराया जा सके।

हाईकोर्ट ने गिनाईं जांच की बड़ी खामियां
डिवीजन बेंच ने जांच में कई गंभीर कमियों का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि किसी प्रत्यक्षदर्शी ने आरोपियों की पहचान नहीं की, टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (TIP) नहीं कराई गई और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट भी पेश नहीं की गई। इसके अलावा जब्त हथियार आरोपियों के कब्जे से बरामद नहीं हुए और शस्त्र अधिनियम के तहत आवश्यक अभियोजन स्वीकृति का रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं था।

कोर्ट ने यह भी कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की श्रृंखला पूरी तरह साबित नहीं हो सकी और घायल जवानों की गवाही न लिया जाना जांच की बड़ी विफलता रही। अदालत ने माना कि इन परिस्थितियों में निचली अदालत के पास आरोपियों को बरी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

ऐसी चूक न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर करती है
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को भविष्य में ऐसे मामलों की जांच में उच्च मानक अपनाने की नसीहत दी। कोर्ट ने कहा कि फॉरेंसिक, तकनीकी और प्राथमिक साक्ष्यों की कमी न्याय प्रणाली में आम जनता के विश्वास को कमजोर करती है और प्रक्रियात्मक चूकों का फायदा अपराधियों को मिल जाता है।

देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में से एक था ताड़मेटला कांड
गौरतलब है कि 6 अप्रैल 2010 को दंतेवाड़ा जिले के ताड़मेटला जंगल में नक्सलियों ने CRPF की 62वीं बटालियन पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में CRPF के 75 जवानों समेत कुल 76 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। निचली अदालत ने वर्ष 2013 में साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
इस हमले का मास्टरमाइंड कुख्यात नक्सली हिड़मा माना जाता था, जिसे नवंबर 2025 में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में मार गिराया


































