KAWARDHA NEWS. सुशासन तिहार के तहत सोमवार को कबीरधाम जिले के ग्राम लोखान में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने प्रशासनिक दौरे को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय निर्माणाधीन पंचायत भवन के औचक निरीक्षण के दौरान सीधे श्रमिकों के बीच पहुंच गए। उनका यह दौरा केवल कार्यों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आमजन के साथ उनके सहज संवाद और जुड़ाव का जीवंत उदाहरण बन गया। मुख्यमंत्री के अचानक पहुंचने से वहां काम कर रहे श्रमिकों में उत्साह का माहौल बन गया। सभी ने उनका आत्मीय स्वागत किया और बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया।

निरीक्षण के दौरान काम कर रहीं महिला श्रमिकों ने मुख्यमंत्री को स्नेहपूर्वक दोपहर के भोजन के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने इस आमंत्रण को सहजता से स्वीकार किया और उनसे उनके भोजन के बारे में पूछा। महिलाओं ने बताया कि वे घर से पारंपरिक व्यंजन—बोरे बासी, पान पुरवा रोटी, चना भाजी, चरोटा भाजी, मुनगा बड़ी और आमा (आम) की चटनी लाई हैं। यह सुनते ही मुख्यमंत्री ने उनके साथ बैठकर वही भोजन करने का निर्णय लिया।

मुख्यमंत्री जमीन पर श्रमिकों के बीच बैठ गए और उनके टिफिन से ही भोजन ग्रहण किया। बोरे-बासी और आमा चटनी का स्वाद लेते हुए उन्होंने कहा कि यह भोजन उनकी अपनी संस्कृति और जीवनशैली का हिस्सा है। भोजन के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रमिक महिलाओं से संवाद करते हुए विभिन्न शासकीय योजनाओं की जमीनी स्थिति जानी। उन्होंने महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी ली।

महिलाओं ने भी खुलकर अपने अनुभव साझा किए, जिससे मुख्यमंत्री को योजनाओं के क्रियान्वयन का सीधा फीडबैक मिला। जब मुख्यमंत्री ने गांव की समस्याओं के बारे में पूछा, तो महिलाओं ने पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण पेयजल की गंभीर समस्या बताई। उन्होंने कहा कि बोरवेल और हैंडपंप लंबे समय तक काम नहीं करते, जिससे गर्मी में पानी की दिक्कत बढ़ जाती है। इस पर मुख्यमंत्री ने तुरंत संज्ञान लेते हुए कलेक्टर से जानकारी ली।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ यही है कि शासन की योजनाएं समय पर और प्रभावी तरीके से आमजन तक पहुंचे। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार जनसमस्याओं के समाधान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। यह पूरा घटनाक्रम न केवल प्रशासनिक सक्रियता, बल्कि जनसंवेदनशील नेतृत्व की एक मजबूत तस्वीर भी पेश करता है, जहां सत्ता और समाज के बीच की दूरी मिटती नजर आई।



































