ARANG NEWS. जिले में खाद की कमी और कालाबाजारी को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। किसान नेताओं ने आरोप लगाया है कि खाद संकट का फायदा उठाकर निजी व्यापारी किसानों को निर्धारित कीमत से कई गुना अधिक दाम पर खाद बेच रहे हैं। साथ ही बाजार में नकली और अमानक खादों की बिक्री भी तेजी से बढ़ रही है, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है।

किसान नेताओं का कहना है कि पिछले वर्ष भी व्यापारियों ने जमकर कालाबाजारी की थी। यूरिया खाद, जिसकी सरकारी कीमत 266 रुपये थी, उसे किसानों को 2000 से 2500 रुपये तक में बेचा गया। आरोप लगाया गया कि इस वर्ष भी उसी तरह की साजिश रची जा रही है और किसानों को फिर से संकट में डालने की तैयारी है।

नेताओं ने कहा कि खेती-किसानी का समय शुरू हो चुका है, लेकिन किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। वहीं दूसरी ओर डीजल की कमी से खेत जुताई का काम भी प्रभावित हो रहा है। उनका आरोप है कि भाजपा सरकार किसानों की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है और व्यापारी व पूंजीपति वर्ग को प्राथमिकता दे रही है।

कांग्रेस शासनकाल का जिक्र करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि पिछली सरकार ने कर्जमाफी, धान का समर्थन मूल्य बढ़ाने और धान खरीदी का कोटा बढ़ाकर किसानों को राहत दी थी। जबकि वर्तमान सरकार में किसानों को खाद, धान बिक्री और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

किसान नेता प्रकाश मारकंडेय ने कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं, लेकिन लगातार बढ़ती समस्याओं के कारण वे आर्थिक और मानसिक दबाव में आ रहे हैं। कई किसान आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं।
इस संबंध में प्रकाश मारकंडेय, दयाल माण्डले, कमलदेव साहू, रोहित साहू, दिलीप कोठारी, राजा तिवारी, लुकेश टंडन, गुरु द्वारिका साहेब, रोशन साहू, घनश्याम यादव और प्रकाश साहू सहित अन्य लोगों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कालाबाजारी रोकने की मांग की है।





































