RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में गुरुवार को महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लेकर जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिला। लोकसभा से इस विधेयक के पारित नहीं होने के मुद्दे पर सत्तापक्ष ने विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी के साथ सत्र आयोजित किया।

सत्र की शुरुआत छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व सदस्य जगेश्वर राम भगत और राज्यसभा की पूर्व सदस्य मोहसिना किदवई को श्रद्धांजलि देकर की गई।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विपक्ष के हंगामे के बीच महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के लिए शासकीय संकल्प प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सदन में चार घंटे का समय निर्धारित किया गया।

मुख्यमंत्री के प्रस्ताव के बाद नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने अशासकीय संकल्प प्रस्ताव पेश किया, जिसे आसंदी ने स्वीकार नहीं किया। इस फैसले पर डॉ. महंत ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार निंदा प्रस्ताव की बात कर रही थी, लेकिन प्रस्तुत प्रस्ताव उस दिशा में नहीं है। इसके बाद विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया और आरोप लगाया कि महिलाओं को गुमराह किया जा रहा है।

बीजेपी विधायक लता उसेंडी ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल में बाधा डालने का काम विपक्ष ने किया है और लोकसभा में इसे गिराने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने महिलाओं की भावनाओं और सम्मान की अनदेखी की है।

वहीं, कांग्रेस विधायक अनिला भेड़िया ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि बिल 2023 में पारित हो चुका है, इसलिए इसे 2029 के बजाय तत्काल लागू किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि नारी सम्मान की रक्षा हमेशा सर्वोपरि रही है और इसका अपमान करने वालों का अंत निश्चित होता है।






































