WASHINGTON NEWS. मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर स्थिति और गंभीर हो गई है। ईरान ने साफ कर दिया है कि मौजूदा हालात में इस अहम समुद्री मार्ग को दोबारा नहीं खोला जाएगा। यह वही रास्ता है, जिससे दुनिया के बड़े हिस्से का तेल परिवहन होता है—ऐसे में इसका बंद रहना वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि जब तक अमेरिकी नाकेबंदी जारी है, तब तक किसी भी तरह का युद्धविराम (सीजफायर) संभव नहीं है।

बाकेर ने आरोप लगाया कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाकर आर्थिक दबाव बना रहा है, जो “दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने” जैसा है। तनाव के बीच कूटनीतिक हल की भी कोशिशें जारी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत हो सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी संकेत दिया है कि दोनों देश जल्द बातचीत की टेबल पर लौट सकते हैं।

इस बीच, लेबनान में इजराइली हवाई हमले में पत्रकार अमल खलील की मौत हो गई। वे पिछले दो दशकों से संघर्ष क्षेत्र में रिपोर्टिंग कर रही थीं। इजराइली सेना का कहना है कि कार्रवाई “युद्धविराम उल्लंघन” के जवाब में की गई, जबकि स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक पत्रकार एक घर में शरण लिए हुए थीं। इस साल अब तक लेबनान में 9 पत्रकारों की मौत हो चुकी है।

ये भी जानना जरूरी
- तेल आपूर्ति पर राहत: अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर दी गई छूट 30 दिनों के लिए बढ़ाई, ताकि वैश्विक सप्लाई प्रभावित न हो।
- सीजफायर पर अलग-अलग दावे: अमेरिका ने युद्धविराम बढ़ाने की बात कही, जबकि ईरान ने इसे खारिज कर दिया।
- जहाजों की जब्ती: ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज क्षेत्र में दो जहाजों को कब्जे में लिया, सुरक्षा का हवाला दिया।
- उड़ानों पर असर: लुफ्थांसा ने ईंधन कीमतों में उछाल के चलते 20 हजार उड़ानें रद्द करने का फैसला किया।
- तेहरान में शक्ति प्रदर्शन: राजधानी में मोजतबा खामेनेई के पोस्टर-बैनर दिखाई दिए, जो आंतरिक संदेश देने की कोशिश माने जा रहे हैं।

क्या है बड़ा असर?
होर्मुज स्ट्रेट का बंद रहना सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक संकट बन सकता है। तेल की सप्लाई, एयरलाइंस, और अंतरराष्ट्रीय व्यापार—तीनों पर इसका सीधा असर दिखने लगा है।
अगर आने वाले दिनों में बातचीत सफल नहीं होती, तो यह टकराव और व्यापक आर्थिक संकट में बदल सकता है।







































