NEW DELHI NEWS. मध्य-पूर्व में चल रहा अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष अब और गंभीर होता जा रहा है। युद्ध के 33वें दिन तेहरान पर बड़े पैमाने पर हमले की खबरों ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है। शहर के कई इलाकों में जोरदार धमाके सुनाई दिए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। हालात को देखते हुए एयर डिफेंस सिस्टम तुरंत सक्रिय कर दिया गया।

ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजरायल ने राजधानी में स्थित टोफिघ दारू फार्मास्युटिकल प्लांट को निशाना बनाया। इस हमले से दवाओं की सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं संभली, तो स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है।होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी तनाव तेजी से बढ़ रहा है।

संयुक्त अरब अमीरात सैन्य कार्रवाई के जरिए इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खोलने के विकल्प पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह अमेरिका और अन्य सहयोगी देशों के साथ मिलकर कदम उठा सकता है। यह स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने दक्षिणी लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की मौत के मामले में अपनी संलिप्तता से इनकार किया है।

लेबनान के बानी हैयान क्षेत्र में हुए विस्फोट को लेकर जांच के बाद आईडीएफ ने कहा कि इस घटना में उसकी कोई भूमिका नहीं पाई गई है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने क्षेत्रीय देशों से अपील की है कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न होने दें। उन्होंने कहा कि ईरान केवल अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है। उनका कहना है कि हमलों में नागरिक ठिकाने जैसे होटल, एयरपोर्ट और रिहायशी इलाकों को भी नुकसान पहुंच रहा है।

इराक में ऑयलफील्ड के पास गिरा ड्रोन
इराक के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि दक्षिणी हिस्से में स्थित मजनून ऑयलफील्ड के पास एक ड्रोन गिरा, लेकिन वह फटा नहीं। इस वजह से बड़ा नुकसान टल गया और किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

स्थिति बेहद संवेदनशील
लगातार हो रहे हमलों, बढ़ती सैन्य तैयारियों और वैश्विक तेल आपूर्ति पर मंडराते खतरे ने इस संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय संकट में बदल दिया है। आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।




































