BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला न्यायालय में फर्जी बीमा क्लेम के जरिए न्यायपालिका को धोखा देने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में कोर्ट के आदेश पर सिविल लाइन पुलिस ने पांच वकीलों, एक नोटरी और एक ग्रामीण के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना का मामला दर्ज किया है।

पूरा मामला तब उजागर हुआ जब जशपुर जिले के बगीचा क्षेत्र की रहने वाली प्रेमिका कुजूर खुद न्यायालय पहुंचीं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उनके नाम से ‘प्रेमिका कुजूर बनाम मुरली यादव’ के नाम से एक क्षतिपूर्ति दावा पेश किया गया था, जबकि उन्होंने न तो कोई केस दायर किया है और न ही किसी वकील को वकालतनामा दिया है।

बिना हस्ताक्षर और उपस्थिति के तैयार हुए दस्तावेज
13 मार्च को जब आवेदिका का बयान लिया गया, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। जांच में पता चला कि भोले-भाले ग्रामीणों के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से मुआवजा हड़पने की कोशिश की जा रही थी। सबसे गंभीर बात यह रही कि आवेदकों की अनुपस्थिति में ही शपथ पत्रों का नोटरी प्रमाणीकरण कर दिया गया था।

इन लोगों पर दर्ज हुई एफआईआर (FIR)
कोर्ट के प्रस्तुतकार ज्ञानेंद्र दुबे की शिकायत पर सिविल लाइन पुलिस ने एनपी चंद्रवंशी, भगवती कश्यप, शुभम चंद्रवंशी और सूरज कुमार, संतोष कुमार यादव (शपथ पत्र के फर्जी प्रमाणीकरण के लिए), जशपुर निवासी जोनी कुजूर और एक अन्य ग्रामीण के खिलाफ धाराएं दर्ज की हैं

कोर्ट की टिप्पणी
यह न्यायिक प्रक्रिया में झूठा साक्ष्य गढ़ने और आपराधिक साजिश का गंभीर मामला है।





































