BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षाकर्मियों की सेवा गणना का आधार उनकी नियुक्ति नहीं, बल्कि संविलयन की तारीख होगी। इस निर्णय ने राज्य के 1188 शिक्षकों की वह उम्मीद खत्म कर दी, जिसमें वे 10 वर्ष की सेवा पूर्ण होने का हवाला देकर c मांग रहे थे।

हाईकोर्ट ने कहा कि पंचायत राज अधिनियम के तहत नियुक्त शिक्षाकर्मी संविलयन से पहले स्कूल शिक्षा विभाग के कर्मचारी नहीं थे। इसलिए उनकी सेवा अवधि की गिनती 1 जुलाई 2018 से ही शुरू मानी जाएगी। इसका मतलब यह हुआ कि भले किसी शिक्षाकर्मी ने पंचायत विभाग में 10–15 साल काम कर लिया हो, लेकिन प्रमोशन का अधिकार तभी बनेगा जब संविलयन के बाद विभागीय सेवा में 10 साल पूरे हों।

क्यों फेल हुआ 10 साल सेवा वाला तर्क?
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि उन्होंने 10 साल की सेवा पूरी कर ली है, इसलिए 2017 के सर्कुलर के मुताबिक उन्हें क्रमोन्नति मिलनी चाहिए। लेकिन शासन ने अदालत में साफ कहा 2017 का सर्कुलर केवल सरकारी शिक्षकों पर लागू होता है। संविलयन से पहले शिक्षाकर्मी जनपद पंचायत के अधीन थे इसलिए संविलयन से पहले की सेवा को सरकारी सेवा नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने शासन के इन तर्कों को सही ठहराया।

संविलयन नीति बना कानूनी दीवार
कोर्ट ने 30 जून 2018 की संविलयन नीति का जिक्र करते हुए कहा कि नीति में स्पष्ट लिखा है पूर्व शिक्षाकर्मी संविलयन की तारीख से ही शासकीय शिक्षक माने जाएंगे इससे पहले की सेवा पर कोई लाभ, वेतनवृद्धि या वरिष्ठता का दावा नहीं किया जा सकता सोना साहू मामला क्यों लागू नहीं हुआ? याचिकाकर्ताओं ने समानता के लिए सोना साहू केस का हवाला दिया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि उस मामले के तथ्य पूरी तरह अलग थे। इसलिए उसे मिसाल मानकर लाभ नहीं दिया जा सकता।

फैसले का प्रभाव क्या?
- 1188 शिक्षकों की याचिकाएं एक साथ खारिज
- भविष्य में भी प्रमोशन की गणना 2018 से ही
- पंचायत सेवा को सरकारी सेवा नहीं माना जाएगा
- संविलयन की तारीख प्रमोशन, वेतनवृद्धि और वरिष्ठता तय करने का आधार बनेगी
इस फैसले ने हजारों शिक्षाकर्मियों को यह संदेश दे दिया है कि संविलयन से पहले की पंचायत-सेवा को विभागीय पदोन्नति के लिए गिना नहीं जाएगा।




































