NEW DELHI. फिल्म आदिपुरुष को लेकर पूरे देश में चल रहे हंगामे के बीच केंद्र सरकार ने भी कठोर टिप्पणी की है। केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने सोमवार को स्पष्ट कर दिया है कि देश में किसी को भी धार्मिक भावनाओं को आहत करने का अधिकार नहीं है। ओम राउत के निर्देशन में बनी फिल्म के डायलॉग और सीन को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का कहना है कि सेंसर बोर्ड ने इस विषय पर जो भी फैसला करना था, उसे वे कर चुके हैं। यह उनका काम है। फिल्म के निर्माताओं और निर्देशकों ने फिल्म में डायलॉग को बदलने की बात कही है। किसी को भी धार्मिक भावनाओं को आहत करने का अधिकार नहीं है।
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करणी सेना ने दी पिटाई करने की धमकी
आदिपुरुष के सीन और डायलॉग्स को लेकर मध्यप्रदेश में भी विरोध हो रहा है। करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज शेखावत ने कहा है कि धार्मिक ग्रंथ की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हिंदू देवी-देवताओं के वस्त्र में भी चूक हुई है। इसके डायलॉग्स बर्दाश्त करने लायक नहीं हैं। फिल्म के डायरेक्टर को ढूंढो और मारो। फिल्म में हर पात्र निभाने वाले कलाकार को पीटेंगे। राज शेखावत ने कहा कि करणी सेना इन लोगों को मारेगी…पक्का मारेगी।
इसके अलावा, आनंद सागर के रामायण सीरियल में हनुमान का पात्र निभाने वाले विक्रम मस्ताल ने भोपाल में कहा कि वे फिल्म को लेकर कानूनी कार्रवाई करेंगे। विक्रम ने कहा कि मैं इस मूवी का पूरी तरह से विरोध करता हूं। श्रीराम और हनुमानजी के पात्र को जिस तरह से दिखाया गया वो पूरी तरह से गलत है। आराध्य ने कभी इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं किया, जैसा फिल्म में दिखाया गया है।
मनोज मुंतशिर ने की सुरक्षा की मांग
हंगामे के बढ़ने पर फिल्म के डायलॉग लेखक मनोज मुंतशिर ने अपनी सुरक्षा की मांग की है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि देश भर के लोगों की भावनाओं को देखते हुए फिल्म के डायलॉग को एक हफ्ते में बदल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि रामायण की कहानी से एक शिक्षा मिलती है कि लोगों की भावनाएं महत्वपूर्ण हैं। सही और गलत समय के साथ बदल जाता है। मगर, भावनानएं रह जाती हैं।

ये हैं फिल्म आदिपुरुष के विवादित डायलॉग
लंका दहन से पहले बजरंबली की पूंछ में आग लगाने से पहले इंद्रजीत कहते हैं ‘जली न, अब और जलेगी, बेचारा जिसकी जलती है वही जनता है। इस पर बजरंबली कहते हैं, ‘कपड़ा तेरे बाप का! तेल तेरे बाप का! जलेगी भी तेरे बाप की।’बजरंबली जब सीता से मिलने अशोक वाटिका जाते हैं, जहां उन्हें लंका का एक राक्षस सैनिक बजरंबली से कहता है- तेरी बुआ का बगीचा है, क्या जो हवा खाने चला आया। लंका दहन के बाद जब बजरंगबली राम सेना के पास पहुंचते हैं, तो लंका में हुए दहन की व्याख्या में कहते हैं- बोलकर आया हूं लंका में कि जो हमारी बहनों को हाथ लगाएंगा, उनकी लंका लगा देंगे। विभीषण जब रावण को समझाने जाते हैं तब कहते हैं, भैया आप अपने काल के लिए कालीन बिछा रहे हैं। लक्ष्मण को मूर्छित करने के बाद इंद्रजीत कहते हैं- मेरे एक सपोले ने तुम्हारे शेषनाग को लंबा कर दिया, अभी तो पूरा पिटारा भरा पड़ा है। रावण विभीषण से कहता है- अयोध्या में तो वो रहता नहीं. रहता तो वो जंगल में है और जंगल का राजा शेर होता है। तो वो कहा का राजा है रे।




































