TIRANDAJ DESK. विश्व मानसिक स्वास्थ्य के विषय में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) दुनियाभर में मनाया जाता है। मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण रिपोर्ट्स 2016 के अनुसार हमारे देश में प्रत्येक 20 व्यक्तियों में से 01 व्यक्ति मानसिक रोग से पीड़ित है। लेकिन आज भी यह पता कर पाना कि हम मानसिक रोग से पीड़ित हैं या नहीं बहुत मुश्किल है। आज हम आपको बताएंगे कि आप कैसे पता कर सकते हैं कि आप मानसिक रोग से ग्रसित हैं या नहीं और आपको मानसिक रोग विशेषज्ञ की सलाह लेने की आवश्यकता है या नहीं।
स्पर्श हॉस्पिटल भिलाई के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र रत्नानी कहते हैं कि किसी भी मानसिक रोग को पता करने का सबसे पहला शुरुआती लक्षण 3 होते हैं, जिसमें अच्छी नींद, अच्छी भूख और अच्छा प्यार आता है। अगर ये तीन मिलने में किसी इंसान को दिक्कत हो रही है तो उसे तत्काल मानसिक रोग विशेषज्ञ के पास जाकर सलाह लेनी चाहिए। कई बार तो ऐसा होता है कि मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्ति को पता ही नहीं चलता है कि उसे किसी प्रकार की समस्या है। ऐसे में मानसिक रोगी के घरवालों को उसके बदलते व्यवहार को देखकर उसे मानसिक रोग विशेषज्ञ के पास लेकर आना चाहिए।

इस वर्ष ये होगी थीम
प्रत्येक वर्ष विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस को मानाने का अलग-अलग थीम रखा जाता है। इस वर्ष विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2022 (World Mental Health Day) में वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ की ओर से ‘मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को वैश्विक प्राथमिकता बनाएं’ (Make Mental Health and Well-Being for All a Global Priority) का थीम इस दिवस के अवसर पर रखा गया है।

भारत का इस क्षेत्र में प्रयास
भारत ने 1982 में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) प्रारंभ किया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को विकसित करना था। इस ओर सरकार का ज्यादा ध्यान देना जरुरी इसलिए है, क्योंकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण द्वारा 2016 में जारी किए सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार देश में प्रत्येक 20 में से 1 व्यक्ति मानसिक रोग से पीड़ित है।

मानसिक रोग और शारीरिक रोग में नहीं होगा भेदभाव
भारत में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम,2017 की धारा 21(4)-A के अनुसार मानसिक बीमारियों और शारीरिक बीमारियों के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। साथ ही जो भी व्यक्ति अपना स्वास्थ्य बीमा करवाता है, उसका प्रयोग वह बिलकुल उसी तरह से कर सकता है। जैसे कि शारीरिक बीमारियों के इलाज के लिए वह करता है। लेकिन बीमा कंपनियां अपनी बीमा पालिसी से बड़ी संख्या में मानसिक बीमारियों को बाहर रखती हैं।



































