पंडवानी को विश्व मंच तक पहुंचाने वाली पद्म विभूषण सम्मानित लोकगायिका का निधन, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा– छत्तीसगढ़ ने अपनी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर खो दी
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योजना के अंतर्गत लोक एवं पारंपरिक जनजातीय कलाओं में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक नृत्य-गीत, लोकसंगीत, पंडवानी, ददरिया, करमा, सुवा, राउत नाचा, गोंडी गायन-वादन सहित अन्य लोक परंपराओं को शामिल किया गया है। Read More
बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति, शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि शामिल है, इन विधाओं में प्रदर्शन और प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी
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छत्तीसगढ़ की संस्कृति, समाज सेवा, साहित्य, कला और लोक परंपरा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को दिया जाता है राज्य अलंकरण पुरस्कार
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