याचिकाकर्ता का कहना है कि यह विधेयक नागरिकों को संविधान के तहत मिले धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है। उनका तर्क है कि धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया में प्रशासन को पूर्व सूचना देने जैसी शर्तें व्यक्तिगत निजता (Right to Privacy) में दखल हैं। साथ ही, कानून में प्रयुक्त शब्दावली को अस्पष्ट बताते हुए इसके दुरुपयोग की आशंका भी जताई गई है। Read More





























