13 मार्च को जब आवेदिका का बयान लिया गया, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। जांच में पता चला कि भोले-भाले ग्रामीणों के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से मुआवजा हड़पने की कोशिश की जा रही थी। सबसे गंभीर बात यह रही कि आवेदकों की अनुपस्थिति में ही शपथ पत्रों का नोटरी प्रमाणीकरण कर दिया गया था। Read More





























