कोर्ट की टिप्पणी इस बात की ओर इशारा करती है कि अब तक नदी संरक्षण योजनाएं कागज़ों तक सीमित रहीं। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि नदियों के प्राकृतिक प्रवाह, प्रदूषण नियंत्रण और पुनर्जीवन के लिए केवल प्रशासनिक अनुभव नहीं, बल्कि हाइड्रोलॉजी, पर्यावरण और भूगोल के विशेषज्ञों की भूमिका अहम होगी। Read More





























