INDORE NEWS. मध्य प्रदेश के सीनियर आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा का हालिया विवादित बयान ब्राह्मण समाज के आक्रोश का सबसे बड़ा कारण बन गया है। उन्होंने कहा था कि बेटे के लिए ब्राह्मण बेटी दान मिलने तक रिजर्वेशन जरूरी है। इस बयान ने जातिगत और धार्मिक भावनाओं को भड़काकर व्यापक विरोध पैदा कर दिया है।

इंदौर के थाने में पहुंचे ब्राह्मण समाज के लोग
ब्राह्मण समाज ने इस बयान को असंवेदनशील, जातिगत और लैंगिक भेदभाव भरा बताया है। समाज के लोगों ने विरोध जताते हुए इंदौर के राजेंद्र नगर थाने में आईएएस वर्मा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 298 और 302 के तहत एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि वर्मा ने जानबूझकर ब्राह्मण जाति के धार्मिक मान्यताओं का अपमान किया है।

सड़कों पर उतरे ब्राह्मण संगठन
इस बयान के बाद ब्राह्मण संगठन सड़कों पर उतर आए हैं। दो-तीन दिनों में कोई कार्रवाई नहीं होने पर वर्मा के पुतले जलाने की धमकी दी है। सीनियर आईएएस वर्मा ने भी बयान पर कायम रहते हुए कहा है कि उन्होंने वही मंच पर कहा था जो सच है और यदि कोई आपत्ति थी तो उसी समय जतानी चाहिए थी।
राजनीतिक और सामाजिक तीव्रता लेते इस विवाद ने प्रदेश में जाति, आरक्षण और सामाजिक सम्मान के मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है। विरोध कर रहे ब्राह्मण संगठनों के साथ-साथ कई राजनीतिक दलों ने भी इस बयान की कड़ी निंदा की है।

भोपाल में भी विरोध
सवर्ण समाज के अधिकारी-कर्मचारी संतोष वर्मा के बयान से आहत हैं। मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के महामंत्री सुधीर ने कहा कि 23 नवंबर को अजाक्स कर्मचारी संगठन के प्रांतीय अधिवेशन में संतोष वर्मा को मध्यप्रदेश का नया प्रांत अध्यक्ष चुना गया था। उन्होंने बताया कि वर्मा ने सवर्ण समाज की बेटियों को लेकर ऐसा बयान दिया जो असंसदीय, अपमानजनक और अति निंदनीय है।

लिहाजा, सवर्ण समाज और उसके अधिकारी-कर्मचारी गहरे आघात और आहत महसूस कर रहे हैं। इसी कारण ब्राह्मण समाज और कर्मचारी संगठनों ने अपने पहले चरण के आंदोलन में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला और प्रमुख सचिव कार्मिक को ज्ञापन दिया है, जिसमें उन्होंने संतोष वर्मा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
































