BHOPAL/ INDORE NEWS. मध्य प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का काम 4 नवंबर 2025 से शुरू हो चुका है। इस प्रक्रिया में लगभग पांच करोड़ 74 लाख पांच हजार मतदाताओं के फॉर्म डिजिटलाइज करने हैं। इस काम के लिए प्रदेश के 65 हजार 14 बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) काम कर रहे हैं।
इस भारी कार्यभार और समय सीमा के भीतर कार्य को पूरा करने के दबाव के कारण बीएलओ पर अत्यधिक तनाव है। पिछले दस दिनों में लगातार 6 बीएलओ की मौत हो चुकी है, जो इस काम से जुड़े गंभीर मानसिक और शारीरिक दबाव को दर्शाता है। कर्मचारी संघ ने इस तनाव के मुकाबले में बेहतर आर्थिक और चिकित्सकीय सुरक्षा की मांग भी उठाई है।
ताजा मामाला मध्य प्रदेश के शहडोल जिले का है। यहां सोमवार को एक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। प्रदेश में पिछले 10 दिनों में छह बीएलओ की मौत की घटनाएं सामने आईं हैं, जो काम के भारी दबाव और तनाव को लेकर सवाल खड़े करती हैं।

मतदाताओं का सर्वेक्षण चुनौतीपूर्ण
मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा क्षेत्रों में 4 नवंबर से चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कार्य में करीब 65 हजार बीएलओ जुटे हैं। सरकार और प्रशासन से राहत की उम्मीद करते हुए मप्र तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने मुख्य चुनाव आयुक्त, नई दिल्ली को पत्र लिखा है।
इसमें बीएलओ की मौत या गंभीर बीमारी पर मुआवजे और मुफ्त इलाज की मांग की गई है। मृतक के परिजनों को 15 लाख रुपए और बीमार कर्मियों को उपचार की आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव है।

छह मौतों की दर्दनाक कहानी
मनीराम नापित (54), शहडोल: सोमवार शाम हार्ट अटैक से निधन हो गया। घटना के समय वह मतदाताओं से फॉर्म भरवा रहे थे। एक अधिकारी के फोन पर तबीयत बिगड़ी और वे अस्पताल पहुंचने से पहले ही जिंदगी की जंग हार गए।
सुजान सिंह रघुवंशी, नर्मदापुरम: एसआईआर सर्वे कर वापसी के दौरान ट्रेन की चपेट में आए। दोनों पैर गंभीर रूप से घायल, इलाज के दौरान दम तोड़ा।
रमाकांत पांडे, मंडीदीप: ऑनलाइन मीटिंग के बाद अचानक गिरकर मौत हो गई। भोपाल के नोबेल अस्पताल में भर्ती थे।
भुवान सिंह चौहान, झाबुआ: हार्ट अटैक से मौत, आठ दिन पहले कार्य में लापरवाही के कारण सस्पेंड थे। परिवार ने तनाव को मौत की वजह बताया।
सीताराम गोंड, दमोह: अस्पताल में अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद जबलपुर रेफर, वहीं इलाज के दौरान निधन।
अनीता नागेश्वर, बालाघाट: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और बीएलओ, काम के दबाव से तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में लीवर डैमेज और संक्रमण के साथ निधन।

परिवार और प्रशासन का दर्द
अनीता के परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। सरपंच व्यंकट राहंगडाले ने परिजनों को 25 लाख रुपए मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी की मांग की है। परियोजना अधिकारी लालबर्रा ने बताया कि संक्रमण ने हालत और खराब कर दी थी।

तनाव में बीते दिन, जिम्मेदारी का भारी बोझ
बीएलओ के कंधों पर भारी जिम्मेदारी है, जिससे उनकी मानसिक और शारीरिक तबीयत पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। इन मौतों ने प्रशासन की कार्यशैली और कर्मचारियों के हित में ठोस कदम उठाने की जरूरत को सामने ला दिया है।


































